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कैग रिपोर्ट में खुलासा: बिना विवेक के तैयार किया बजट, 29 हजार करोड़ खजाने में ही पड़े रह गए

Tue, 12 Aug 2025 11:03 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

UP CAG report: नियंत्रक एवं लेखा महानिरीक्षक (सीएजी) की वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट में कई चूक का खुलासा किया गया है। कई विभागों को लेकर यहां टिप्पणी की गई है।
 
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कैग रिपोर्ट में खुलासा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नियंत्रक एवं लेखा महानिरीक्षक (सीएजी) की वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट में कई चूक का खुलासा किया गया है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में कहा गया है कि खर्च के गलत वर्गीकरण, वित्तीय वर्ष की अन्तिम तिमाही में खर्च में अतिरेक और बड़ी संख्या में अप्रयुक्त प्रावधान की वजह से 75 फीसदी से ज्यादा धन बिना खर्च किए रह गया। अनुपूरक बजट में जिन योजनाओं को शामिल किया गया, उनका मूल बजट भी खर्च नहीं किया गया। उसमें भी 17 हजार करोड़ से ज्यादा बिना खर्च रह गए। अन्य मदों में भी करीब 12465 करोड़ रुपये बिना खर्च पड़े रह गए। इस तरह विकास की मद में खर्च होने वाले 29 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खजाने में पड़े रह गए।

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रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 23-24 के 72 मामलों में मूल बजट में 70288 करोड़ का प्रावधान किया गया था। अनुपूरक में 3312 करोड़ और दे दिए गए। इस तरह बजट 73600 करोड़ से भी ज्यादा हो गया लेकिन खर्च केवल 56549 करोड़ किए गए। इस तरह 17 हजार करोड़ से ज्यादा बच गए। इसी तरह 26 योजनाओं के लिए 15 अनुदान के तहत 9859 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया लेकिन कोई खर्च नहीं किया गया। 55 योजनाओं में 2465 करोड़ का प्रावधान किया गया लेकिन कोई खर्च नहीं किया गया। इन योजनाओं का पैसा दूसरे मद में ट्रांसफर किया गया।

समेकित निधि सबसे महत्वपूर्ण सरकारी खातों में से एक है। इस निधि के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का उपयोग किया जाता है। यह निधि सरकार के सभी खर्चों को कवर करती है। इतने महत्वपूर्ण खाते में 1639 करोड़ कम जमा किए गए। जिसका उपयोग देनदारियों में किया जाना था। सीएजी ने टिप्पणी की है कि इससे साबित होता है कि बजट बिना विवेक के तैयार किया गया या योजनाओं के क्रियान्वन में गंभीर चूक हुई। सीएजी ने कहा कि बजट में शामिल धनराशि को तत्काल सरेंडर करना चाहिए और न करने पर संबंधित अधिकारी को जिम्मेदारी ठहराया जाए।

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4.91 करोड़ खर्च करने के बाद भी नहीं बन सका जौहर विश्वविद्यालय का पंडाल

जौहर विवि - फोटो : संवाद
रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में परिसर में भव्य पंडाल के निर्माण के लिए किया गया 4.91 करोड़ रुपये का व्यय फालतू साबित हुआ। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग का होता है, जिसे किसी भी व्यक्ति, संस्थान, विभाग या एजेंसी को हस्तांतरित या आदान-प्रदान नहीं किया जा सकता है। इसका निर्माण जल निगम की सीएंडडीएस इकाई को करना था, जिसे दिसंबर 2016 में 11.49 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गई थी। बता दें कि इसका निर्माण जून 2017 तक करना था, हालांकि इस बीच संस्कृति विभाग ने पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय का कर दिया। वर्ष 2017 में शुरू हुए इस काम को सरकार बदलने पर रोक दिया गया।
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सीएजी रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी

इसी तरह नगर पंचायत उस्का बाजार सिद्धार्थनगर ने जिला पंचायत की भूमि पर 63 दुकानें बनवा दी, जिससे 1.36 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। इसका निर्माण फरवरी 2017 में 1.36 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद रोक दिया गया। उस्का बाजार में ही सुभाषनगर वार्ड में पशु आश्रय गृह निर्माण के लिए जून 2016 में शासन ने 1.68 करोड़ रुपये मंजूर किए। पहली किस्त के 84 लाख रुपये जारी होने के बाद नवंबर 2016 में कार्य शुरू हुआ और 47.82 लाख खर्च होने के बाद रोक दिया गया। महराजगंज स्थित नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार में कार्यालय परिसर में पशु आश्रय गृह निर्माण के लिए 1.93 करोड़ की मंजूरी दी गई, हालांकि बाद में भूमि की उपलब्धता नहीं होने की वजह से इसे दूसरी जगह प्रस्तावित कर दिया गया। अप्रैल 2017 में 48.81 लाख रुपये खर्च होने के बाद काम रोक दिया गया।
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