रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में परिसर में भव्य पंडाल के निर्माण के लिए किया गया 4.91 करोड़ रुपये का व्यय फालतू साबित हुआ। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग का होता है, जिसे किसी भी व्यक्ति, संस्थान, विभाग या एजेंसी को हस्तांतरित या आदान-प्रदान नहीं किया जा सकता है। इसका निर्माण जल निगम की सीएंडडीएस इकाई को करना था, जिसे दिसंबर 2016 में 11.49 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गई थी। बता दें कि इसका निर्माण जून 2017 तक करना था, हालांकि इस बीच संस्कृति विभाग ने पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय का कर दिया। वर्ष 2017 में शुरू हुए इस काम को सरकार बदलने पर रोक दिया गया।
इसी तरह नगर पंचायत उस्का बाजार सिद्धार्थनगर ने जिला पंचायत की भूमि पर 63 दुकानें बनवा दी, जिससे 1.36 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। इसका निर्माण फरवरी 2017 में 1.36 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद रोक दिया गया। उस्का बाजार में ही सुभाषनगर वार्ड में पशु आश्रय गृह निर्माण के लिए जून 2016 में शासन ने 1.68 करोड़ रुपये मंजूर किए। पहली किस्त के 84 लाख रुपये जारी होने के बाद नवंबर 2016 में कार्य शुरू हुआ और 47.82 लाख खर्च होने के बाद रोक दिया गया। महराजगंज स्थित नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार में कार्यालय परिसर में पशु आश्रय गृह निर्माण के लिए 1.93 करोड़ की मंजूरी दी गई, हालांकि बाद में भूमि की उपलब्धता नहीं होने की वजह से इसे दूसरी जगह प्रस्तावित कर दिया गया। अप्रैल 2017 में 48.81 लाख रुपये खर्च होने के बाद काम रोक दिया गया।