शहरी आवासीय सुविधाओं में और इजाफा होगा। अब अफोर्डेबल मकान बनाने के साथ पार्किंग की सुविधाएं दी जाएंगी।
अपार्टमेंट कल्चर को बढ़ावा दिया जाएगा और अधिक ऊंची इमारतें बनाने की अनुमति दी जाएगी। सड़क चौड़ीकरण के साथ फ्लाईओवर बनेंगे। पैदल चलने वालों के लिए फुट ओवरब्रिज होंगे।
आवासीय व व्यावसायिक योजनाओं में किसान पार्टनर होंगे। किसानों से ली गई कुल जमीन का 25 प्रतिशत उन्हें विकसित करके दिया जाएगा।
प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयां शहरों से बाहर होंगी। अवैध कॉलोनियों पर नकेल के लिए उनकी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी। हाईटेक टाउनशिप व इंटीग्रेटेड टाउनशिप में मिक्स लैंडयूज की अनुमति होगी।
राज्य सरकार ने लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए नई आवास नीति पर बुधवार को कैबिनेट की बैठक में सैद्धांतिक सहमति दे दी। मुख्यमंत्री को इसे मंजूरी देने के लिए अधिकृत किया गया है।
उत्तर प्रदेश में 1995 में आवास नीति बनाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2007 से नई आवास नीति बनाने की कवायद चल रही थी, जिसे सैद्धांतिक सहमति सात साल बाद जाकर मिली है।
नई आवास नीति में ऐसी व्यवस्था की गई है कि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
प्राइवेट पार्टनर के सहयोग से आउटर रिंग रोड, बाईपास बनाए जाएंगे। शहर के अंदर खाली पड़ी जमीनों का आवासीय योजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।
गरीबों के लिए 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस और अल्प आय वर्ग के लिए इतने प्रतिशत ही मकान बनाए जाएंगे। वेंडिंग जोन चिह्नित होने के साथ, सामुदायिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।