मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा को प्रदेश में वर्ष 2019-20 में लागू किए जाने के फैसले को हरी झंडी दे दी गई। प्राकृतिक आपदाओं व रोके न जा सकने वाले अन्य जोखिमों जैसे रोग व कीट आदि से फसल नष्ट होने पर यह बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है।
खरीफ मौसम में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, तिल, सोयाबीन, मूंगफली और रबी मौसम में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-रसरों, आलू और अलसी को ग्राम पंचायत स्तर पर बीमित किया जाएगा। प्रतिकूल मौसम होने पर बोआई न कर पाने पर बीमित कृषक को बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक तत्काल क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। कम वर्षा, बेमौसम व अधिक वर्षा, पाला, कम व अधिक तापमान, आर्द्रता आदि से फसल नष्ट होने पर पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का संचालन किया जाएगा। मौसम की स्थिति के आकलन के लिए ब्लॉक में दो स्वचालित मौसम केंद्र की स्थापना बीमा कंपनी की ओर से स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से की जाएगी। मौसम के प्रतिदिन के आंकड़ों के आधार पर फसल की संभावित क्षति का आकलन किया जाएगा।
अब खनन पट्टे वाले जिलों में नहीं होगा भंडारण
खनन को लेकर सरकार द्वारा पूर्व में तय बाध्यताओं में संशोधन किया गया है। मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को तय किया कि नदी तलीय खनन क्षेत्र के पट्टा धारक को अब उस जिले में भंडारण की अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व में यह भंडारण पट्टा धारक को स्वीकृत खनन क्षेत्र में भंडारण की अनुमति थी।
इसके अलावा खनिज स्रोत से दस किमी दायर में भंडारण पूर्व में तय दस किमी की परिधि में भंडारण पर प्रतिबंध में बदलाव करते हुए अब इसे पांच किमी कर दिया गया है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नदी तलीय उप खनिज का भंडारण की स्वीकृति पांच किमी की परिधि में नहीं की जा सकेगी।
काष्ठ आधारित उद्योगों में मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी सृजित
इन्वेस्टर्स समिट में मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी के एमओयू साइन करने वाले काष्ठ आधारित उद्योगों के लिए लाइसेंस देने की नीति तय कर दी गई है। मंत्रिमंडल ने इस संबंध में राज्य स्तरीय समिति के फैसले केमद्देनजर फैसला किया है।
इसके लिए इंडस्ट्रियल एंड एंप्लायमेंट प्रमोशन पालिसी - 2017 केतहत पूर्व में स्वीकृत 8 श्रेणियों के अलावा मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा की अतिरिक्त श्रेणी के सृजन को मंजूरी दी गई है। नव सृजित श्रेणी में राज्य स्तरीय समिति द्वारा आवंटित प्रकाष्ठ की मात्रा की सीमा तक नए लाइसेंस दिए जाने का प्रस्ताव है। यह भी तय हुआ है कि अवशेष प्रकाष्ठ की मात्रा के संबंध में राज्य स्तरीय समिति फैसला करेगी।
इसमें राज्य के औद्योगिक विकास विभाग की इंडस्ट्रियल एंड एंप्लायमेंट प्रमोशन पालिसी - 2017 केतहत मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी में एमओयू करने वाले उद्यमियों को अवसर दिए जाने के लिए यह फैसला किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से प्रदेश के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित होंगे।