राजधानी लखनऊ में निष्क्रांत संपत्ति पर बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेटों के अवैध निर्माण को ढहाने के बाद सरकार निष्क्रांत संपत्तियों के प्रबंधन व निस्तारण का नया कानून जल्द से जल्द बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे संबंधित अध्यादेश के मसौदे पर कैबिनेट की मंजूरी लेने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसमें अवैध कब्जे से बेदखली की प्रक्रिया भी तय की जाएगी।
प्रदेश के 41 जिलों के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 1,436 हेक्टेयर निष्क्रांत परिसंपत्तियां निस्तारण के लिए बाकी हैं। इसमें 791 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा 645 हेक्टेयर में भवन आदि शामिल हैं। शहरी क्षेत्र की तमाम परिसंपत्तियां बेशकीमती हैं और इस पर जगह-जगह भू-माफिया के अवैध कब्जे बताए जा रहे हैं। राजधानी में निष्क्रांत संपत्ति पर कब्जा ढहाए जाने के बाद शासन ने यूपी अवशेष निष्क्रांत संपत्ति प्रबंधन एवं निस्तारण अधिनियम-2020 बनाने की कार्यवाही तेज कर दी है। इसके प्रावधानों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रजेंटेशन पहले ही हो चुका है। कैबिनेट की मंजूरी लेने के लिए विभागों से विचार-विमर्श का काम पूरा हो गया है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कानून के मसौदे के साथ इसे लागू करने के लिए नियमावली भी साथ-साथ तैयार की जा रही है। इसमें निष्क्रांत संपत्तियों के प्रबंधन संबंधी कार्यवाही सॉफ्टवेयर के जरिए करने की व्यवस्था की जा रही है। इन संपत्तियों का किस तरह उपभोग किया जाएगा, सरकार यह भी तय कर रही है। अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने बताया कि अधिनियम को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाना है।
यह है निष्क्रांत संपत्ति
ऐसे व्यक्ति जो 1 मार्च 1947 के बाद और 14 अक्तूबर 1949 से पहले बंटवारे के कारण देश से बाहर जाकर बस गए, उनकी संपत्ति निष्क्रांत संपत्ति मानी जाती है। वर्ष 2005 तक निष्क्रांत संपत्तियों के प्रबंधन का काम जिला स्तर पर डीएम/बंदोबस्त आयुक्त व उपजिलाधिकारी/प्रबंधक अधिकारी द्वारा किया जाता रहा है। 2005 में निष्क्रांत संपत्ति संबंधी पांच एक्ट समाप्त कर दिए गए। अब ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन में कोई स्पष्ट कानून न होने से मुश्किलें आती हैं।
निष्क्रांत संपत्ति से बेदखली की कार्रवाई तय
इस एक्ट के अंतर्गत कृषि भूमि पर अनधिकृत व्यक्तियों की बेदखली यूपी राजस्व संहिता, 2006 तथा राजस्व संहिता नियमावली-2016 के प्रावधानों के अंतर्गत करने का प्रस्ताव है। इसी तरह अन्य संपत्तियों से बेदखली यूपी सरकारी स्थान अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली अधिनियम-1971 में शामिल प्रावधानों के अंतर्गत करने का प्रस्ताव है। संपत्तियों की नीलामी के लिए सपंत्ति के मूल्य निर्धारण व नीलामी की प्रक्रिया भी तय की जा रही है।