परिवहन निगम की 750 बसें ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई जाएंगी। इससे हजारों ग्रामीणों का गांव से शहर का सफर आसान होगा।
साधारण सेवा की इन बसों का जिला मुख्यालय से गांव से सीधा कनेक्शन होगा। आजादी के बाद से अब तक जिन मार्गों पर बसें नहीं चली उन पर यह सुविधा शुरू होगी।
परिवहन निगम ने ग्रामीण अंचल में बस संचालन करने से पहले सरकार से 100 करोड़ रुपये की छूट मांगेगा, जिससे गांव में चलने वाली बसों का किराया कम रहे।
निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम ने मंगलवार को बताया कि डीजल औसत सुधरने के कारण 20 करोड़ रुपये महीने की डीजल बचत हुई है।
अब इस डीजल से निगम की 750 साधारण बसों को उन मार्गों पर चलाने को तैयारी चल रही जिस पर अब तक ग्रामीणों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिला है।
इन बसों के संचालन से जिला मुख्यालयों से दूरदराज के गांव सीधे जुड़ जाएंगे।
इसके लिए सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (वित्त) एवं यातायात अधीक्षक की समिति बनाकर रूट का सर्वे कर रिपोर्ट आगामी समीक्षा बैठक में पेश करने को कहा गया है।
ग्रामीणों को इन बसों में सफर करने के लिये कम किराया भी चुकाना होगा, जिसके घाटे की भरपाई सरकार से की जाएगी।
निगम इस सिलसिले में 100 करोड़ रुपये की छूट पाने के लिये सरकार को प्रस्ताव भेजने जा रहा है।
वहीं इन बसों के ड्राइवरों एवं कंडक्टरों को 350 किमी के बजाय 300 किमी सफर करने की बाध्यता रखी जाएगी।