अखिलेश सरकार से त्रस्त नौकरशाह दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, इनमें से कई राजनाथ के सहयोगी भी हैं।
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लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ आईएएस अफसर दिल्ली कूच की तैयारी में हैं।
इनमें से कई ऐसे हैं जो सरकार के करीबी तिकड़मबाज अफसरों के कारण साइडलाइन कर दिए गए हैं या उन्हें अब इस सरकार में बहुत अच्छा भविष्य नहीं दिखाई दे रहा है।
दिल्ली का रुख करने वालों में मुख्य सचिव जावेद उस्मानी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों के नामों की भी चर्चा है। फिलहाल कोई अफसर अभी पत्ते नहीं खोल रहा है लेकिन दिल्ली कनेक्शन के जरिये गुपचुप ढंग से समीकरण बैठाए जाने लगे हैं।
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राजनाथ के सहयोगी भी
खास तौर पर राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में उनकी टीम में शामिल रहे अफसरों का दिल्ली जाना तय माना जा रहा है। भाजपा नेताओं के करीबी कुछ अफसर पहले से ही दिल्ली में तैनात हैं। इन्हें भी अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की शर्मनाक हार के बाद सूबे की नौकरशाही में बड़े पैमाने पर फेरबदल होना तय माना जा रहा है।
राज्य सरकार के किनारे लगाने से पहले बहुत से नौकरशाह दिल्ली की राह पकड़ने की तैयारी में हैं। दिल्ली जाने की जोड़-तोड़ में जुटे अफसरों को अब नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के शपथ लेने का इंतजार है।
इसके बाद अफसरों के दिल्ली की तरफ रुख करने का सिलसिला शुरू हो सकता है। लगभग 20 आईएएस अफसरों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पहले से ही आवेदन कर रखा है।
राज्य सरकार से अनुमति नहीं
इनमें से कई आईएएस अफसरों का केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने संयुक्त सचिव व अपर सचिव पद के लिए सूचीबद्ध (एम्पैनलमेंट) भी कर लिया है।
राज्य सरकार की हरी झंडी न मिल पाने की वजह से तैनाती का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
इनके नाम चर्चा में सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव अब दिल्ली जाना चाहते हैं। फिलहाल वे ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। दिल्ली में बेहतर संभावना दिखाई देने पर वे यूपी छोड़ सकते हैं।
उस्मानी के अलावा जिन नौकरशाहों के दिल्ली जाने की चर्चाएं हैं उनमें मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राकेश गर्ग, नेतराम, जीवेश नंदन, एसपी गोयल, कुमार अरविंद सिंह देव, एसपी सिंह को तो कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय की हरी झंडी भी मिल चुकी है।
भाजपा नेताओं से संबंध
इसके अलावा सदाकांत, संजय अग्रवाल, आनंद मिश्रा अनंत कुमार सिंह, बीएम मीणा, हिमांशु कुमार, सीबी पालीवाल समेत कई अन्य अधिकारी भी दिल्ली की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं।
इन अफसरों के राजनाथ सिंह व भाजपा के अन्य नेताओं से अच्छे संबंध भी हैं और कई राजनाथ के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके सचिवालय में भी रह चुके हैं। राज्य सरकार की एनओसी का इंतजार है।
एनडीए सरकार बनने के बाद दिल्ली की ओर रुख करने वालों में अनंत कुमार सिंह, आनंद मिश्रा भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में भी फेरबदल की चर्चाएं चल रही हैं।
पंचम तल पर तैनात एक ताकतवर आईएएस भी हटाए जाने की स्थिति में दिल्ली का रास्ता पकड़ सकती हैं। इनके भी राजनाथ सिंह से अच्छे संबंध बताए जाते हैं। जब राजनाथ बाराबंकी जिले की हैदरगढ़ सीट से चुनाव जीते थे तो ये आईएएस जिले की डीएम थीं।
अफसरों के काम में सरकार की दखल
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अफसरों के लिए प्रदेश में बहुत कुछ करने को नहीं है। राजनीतिक दखलंदाजी के चलते सही फैसले तक लेना मुश्किल हो जाता है।
इसका इम्पैक्ट लोकसभा चुनाव में दिख रहा है। ऐसे में दिल्ली एक बेहतर विकल्प है। वैसे जल्द ही यूपी की नौकरशाही में भी बदलाव होने की संभावना है।
इसके बाद पता चलेगा कि अगले ढाई-पौने तीन साल तक सरकार की दिशा क्या होगी? इसी की बाद अफसरों का रुख भी साफ हो जाएगा।
जावेद उस्मानी के केंद्र में जाने की चर्चाओं के बीच नए मुख्य सचिव को लेकर भी सत्ता के गलियारे में कयास लगाए जाने लगे हैं।
कॉडर के अफसरों का कहना है कि अगर जावेद उस्मानी दिल्ली जाते हैं तो वरिष्ठता के हिसाब से इस पद के लिए कृषि उत्पादन एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन ही स्वाभाविक दावेदार हैं लेकिन नौकरशाही का एक धड़ा नहीं चाहता है कि वे मुख्य सचिव बनें।
मुख्य सचिव पद के दावेदार रंजन से जूनियर एक आईएएस अफसर अपनी बिरादरी के अफसरों को गोलबंद करके पद पर पहुंचने के प्रयासों में जुटे हैं। चूंकि इस बिरादरी के अफसरों की सीधी पहुंच सत्ता शीर्ष तक है इसलिए इस बात की भी बहुत संभावना है कि वरिष्ठता को दरकिनार कर उन्हें ही मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठा दिया जाए।
ऐसे में जूनियर के अधीन काम करने के बजाय 1978 बैच के आलोक रंजन भी दिल्ली का रास्ता पकड़ सकते हैं। मुख्य सचिव पद के दावेदारों में 1979 बैच के अनिल कुमार गुप्ता भी हैं जो मौजूदा समय में प्रमुख सचिव गृह के पद पर तैनात हैं। इसकेअलावा 1977 और 1978 बैच के आधा दर्जन अधिकारी और भी हैं जो इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।