लखनऊ। नगर निगम की महानगर विस्तार स्थित पीली कॉलोनी में करीब तीन करोड़ रुपये का बंगला 25 लाख रुपये खर्च कर नए सिरे से तैयार किया गया है। इसकी फिनिशिंग का काम चल रहा है। यह बंगला किसी खास को मिलना है, लेकिन जिम्मेदार इससे अनजान बने हुए हैं। खास बात है कि बंगला कागज पर जिस लिपिक के नाम आवंटित है, उसे इसकी जानकारी ही नहीं है।
प्राइम लोकेशन वाली संपत्तियां किसी खास को देने का मामला 20 साल बाद फिर सामने आया है। इस बार खेल में कर्मचारी का सहारा लिया गया है। इसका कारण भी है, क्योंकि करीब 15 साल पहले ऐसे प्रकरण रोकने के लिए नियम बनाया गया था कि आवासीय संपत्तियां अब निगम कर्मचारियों को ही दी जाएंगी।
सूत्रों ने बताया कि बंगला संवारने का काम नगर निगम के ही ठेकेदार कर रहे हैं। ये उस खास व्यक्ति से जुड़े हैं, जिसे बंगला मिलना है।
दो के लिए था बंगला, दिया जा रहा एक को
महानगर पीली कॉलोनी का बंगला नंबर 21 करीब तीन हजार वर्गफीट का है। पहले यह डुप्लेक्स बंगला दो कर्मचारियों को आवंटित होता था। सूत्र बताते हैं कि अब इसे तोड़कर एक कर दिया गया है। ऐसे में 21 नंबर बंगले में ही 24 नंबर शामिल है। पूर्व में यह अमीरुल रहमान और मनजीत कौर को आवंटित था। नगर निगम ने आठ साल पहले आवंटन निरस्त कर इसे अपने कब्जे में लिया था। जिन्हें बंगला आवंटित था, उनके बजाय कोई और इसे तोड़कर बनवाने लगा था।
20 साल पहले भी ऐसा ही हुआ था
विस्थापितों के लिए नगर निगम ने आलमबाग में करीब 20 साल पहले 26 दुकानें बनवाई थीं। इन्हें आवंटित भी विस्थापितों के नाम पर किया गया, लेकिन कब्जा तत्कालीन प्रभावशाली पार्षदों और विधायकों ने कर लिया। ऐसे लोगों के नाम पर महज 600 रुपये महीना किराये पर दुकानें आवंटित की गईं, जिनका पता ढूंढे नहीं मिला। मामला उछलने पर हुई जांच में पूरा खेल सामने आ गया। फिर कार्रवाई के नाम पर प्रकरण शासन और नगर निगम के बीच उलझाकर दबा दिया गया।
नगर निगम की सफाई... अभी जारी नहीं हुआ पत्र
नगर निगम के रेंट प्रभारी राजेश वर्मा ने बताया कि महानगर पीली कॉलोनी का आवास लिपिक विजय कुमार श्रीवास्तव को आवंटित है, लेकिन अभी आवंटन पत्र नहीं जारी हुआ है। निर्माण कौन करा रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। हो सकता है कि कर्मचारी ही अपने पैसे से बंगला ठीक करवा रहा हो। उधर, विजय ने बताया कि उन्हें आवास आवंटित हो गया है, इसकी जानकारी नहीं है। पांच-छह साल पहले नगर निगम में प्रार्थना पत्र दिया था। शुक्रवार को विभाग में जाकर पता करेंगे। वह अभी चिनहट में रहते हैं और मकान पत्नी के नाम पर है।
इसी बंगले को संवारने का चल रहा है काम।- फोटो : अमर उजाला