बुंदेलखंड की बदलती तस्वीर देखने के लिए हमने चित्रकूट से बांदा का रुख किया। यहां के महोखर निवासी आशुतोष बताते हैं कि पिता को दो करोड़ रुपया मुआवजा मिला था। दो भाइयों में बंटवारे के बाद एक छोटा मकान बनवाया और बाकी से प्लाटिंग कर रहे हैं। जमीन के धंधे में मुनाफा खूब है। इसमें खेती न भी करें तो भविष्य में मुनाफा कमा सकें। बांदा के बेंदा गांव के पूर्व प्रधान विवेक सिंह बताते हैं कि अब गिट्टी, मोरंग का काम छोड़ कर तमाम लोग जमीन के काम में उतर रहे हैं। खेती हो या न हो, लेकिन जमीन की खरीद बढ़ी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के आसपास के जिलों में छोटी दुकानें अब बड़ी हो रही हैं। ढाबे बढ़ गए हैं। मैगी प्वाइंट से लेकर गेस्ट हाउस तक बन रहे हैं।
अब स्क्वायर फीट में बिक रही जमीन
यमुना और बेतवा पर फोरलेन हाईवे से खेती वाली जमीनों पर मकान बन रहे हैं। जो जमीन पांच सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट थी, वह 1500 से दो हजार तक पहुंच गई। हमीरपुर से कबरई के रास्ते खन्ना से आगे बढ़ते ही एक होटल पर रुके। होटल संचालक जयाशंकर लोधी पहले कानपुर में नौकरी करते थे। अब होटल चलाने के साथ उन्होंने गांव 30 लोगों को रोजगार दिया है।
बताते हैं कि पहले शाम होते ही सिर्फ ट्रकें दिखती थीं। अब 24 घंटे आवागमन है। ऐसे में तीन शिफ्ट में काम करने वालों को रखा है। बांदा से महोबा मार्ग भी फोरलेन बन रहा है। जहां क्रेसर के धूल के गुबार थे। वहां अन्य कारोबार भी बढ़ रहा है। महोबा के बारीपुरा के दयाशंकर चौरसिया बताते हैं कि एक्सप्रेस वे ही नहीं सोलर प्लांट लगाने वाले भी जमीन किराये पर ले रहे हैं। अभी तक जो जमीन खाली रहती थी, वह किराये पर जा रही है। इससे भी लोगों के पास रुपये आए हैं। कनेक्टिविटी बढ़ने से कारखाने, बाजार और होटल तैयार हो रहे हैं।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से मिली रकम से लोग फोरलेन के किनारे दुकानें खोल रहे हैं। बीटेक की डिग्री लेकर झंसी में एक ब्रांड का शो रूम चलाने वाले पंकज बताते हैं कि सड़कों ने आवागमन आसान किया है। पंकज के मुताबिक पढ़े लिखे युवाओं ने नए तर्ज पर कारोबार का विकास किया है और लोगों की खरीदने की क्षमता भी बढ़ी है। यही वजह है कि दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे कई तमाम लोग लौट रहे हैं। जमीन महंगी हो गई है, लेकिन कारोबार बढ़ा है।