पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले 145 पशुपालकों को नंद बाबा और गोकुल पुरस्कार दिए। इस मौके पर पशुधन मंत्री ने कहा कि पुरस्कृत पशुपालकों ने साबित कर दिया कि यह क्षेत्र भी आय का एक बड़ा जरिया बन सकता है। वह सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो वर्षों के पुरस्कारों का वितरण कर रहे थे। कार्यक्रम में 2020-21 के 53 व 2021-22 के 59 उत्पादकों को गोकुल और 2021-22 के 33 जनपद स्तरीय उत्पादकों को नंदबाबा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि देसी गायों के नस्ल के संरक्षण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ब्रीड़िग में बदलाव कर दो किलो दूध देने वाली देसी गाय 20 किलो दूध देगी, ऐसा प्रयास बरेली में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार दुग्ध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करायएगी। इस व्यवसाय में 70 से 80 प्रतिशत भूमिहीन, लघु एवं सीमान्त कृषकों की सहभागिता है। 33 महिला लाभार्थियों को पुरस्कार मिलना महिलाओं की भागीदारी का सशक्त उदाहरण है। अपर मुख्य सचिव डाॅ. रजनीश दुबे ने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन में दुग्ध विकास विभाग को 33 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे यह व्यवसाय आगे बढ़ेगा।
लखीमपुर खीरी के वरुण सिंह को प्रथम पुरस्कार
गोकुल पुरस्कार के अंतर्गत लखीमपुर खीरी की वेलवा मोती समिति के वरुण सिंह को दो लाख का प्रथम पुरस्कार व बदायूं के कुआं डांडा दुग्ध समिति के हरविलास सिंह को डेढ़ लाख रुपये का द्वितीय पुरस्कार मिला है। नंदबाबा पुरस्कार के तहत मथुरा निवासी भूड़ासानी दुग्ध समिति के हरेन्द्र सिंह को राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया गया। गोकुल पुरस्कार में जिला स्तर पर 51 हजार की राशि दी जाती है। नंदबाबा पुरस्कार में विकास खंड स्तर पर 5100, जनपद में 21000 एवं राज्य स्तर पर 51000 रुपये दिए जाते हैं। इस मौके पर दुग्ध आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील, कुणाल सिल्कू मौजूद रहे।