सूत्रों का कहना है कि पहले रविवार को आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी होनी थी और सोमवार को चुनाव कार्यक्रम घोषित होने थे, लेकिन सोमवार को ही हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई थी। इसलिए तय किया गया कि सुनवाई से पहले ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करा दिया जाए।
लगभग एक ही था बेवसाइट पर अधिसूचना अपलोड और चुनाव तारीख एलान का समय
इसके तहत ही नगर विकास विभाग ने बड़ी ही गोपनीयता के साथ आनन-फानन पहले आरक्षण की अधिसूचना को वेबसाइट पर कराया और इसके ठीक बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। गोपनीयता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अधिसूचना को वेबसाइट पर अपलोड करने और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का समय करीब-करीब एक ही था।
कोर्ट के निर्देश के बाद भी अपलोड नहीं हुई रिपोर्ट
हाईकोर्ट के निर्देश के तीन दिन बाद भी नगर विकास विभाग द्वारा उप्र राज्य निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर पाया है। जबकि हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा 6 अप्रैल को ही निर्देश दिया था कि चार दिन के भीतर आयोग की रिपोर्ट को नगर विकास विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए। ताकि आम लोग भी आयोग आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर किए गए सिफारिशों को देख सकें। इसके बावजूद नगर विकास विभाग ने रविवार की देर रात तक आयोग की रिपोर्ट को अपलोड नहीं किया था।