राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित 1486 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में नए शिक्षकों की तैनाती न करना माध्यमिक शिक्षा विभाग को भारी पड़ा है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने पुराने शिक्षकों से ही अध्यापन कराने पर चालू वित्तीय वर्ष का बजट रोक दिया है।
प्रदेश में कुल 2247 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से 1486 राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित हैं। इन विद्यालयों के भवनों के निर्माण, रखरखाव और शिक्षकों के वेतन का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार देती है। इन स्कूलों के लिए प्रदेश सरकार को नए शिक्षकों की भर्ती करनी थी। लेकिन नए शिक्षकों की भर्ती में विलंब के कारण राज्य सरकार ने राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अभियान के स्कूलों में तैनात कर दिया।
केंद्र ने प्रदेश सरकार को समय-समय पर नए शिक्षकों की तैनाती के लिए पत्र भी भेजा। लेकिन 10760 सहायक अध्यापकों की भर्ती उप्र. लोक सेवा आयोग में लंबित होने से नए शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। वित्तीय वर्ष 2019-20 में विद्यालयों के लिए प्रस्तावित 400.23 करोड़ के बजट में से करीब 240 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिलना है। लेकिन वित्तीय वर्ष बीतने के करीब 11 माह बाद भी केंद्र ने एक भी रुपया नहीं दिया है।
केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में नए शिक्षकों की तैनाती न होने से 25 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। इसलिए बजट नहीं दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी अभियान के तहत संचालित विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन भत्तों पर 305 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसमें करीब 181 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिलना था, लेकिन केंद्र ने सिर्फ 69 करोड़ रुपये ही दिए हैं। इस तरह पिछले वित्तीय वर्ष का भी केंद्रांश 112 करोड़ रुपये बकाया है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों को वेतन देने के लिए प्रदेश सरकार को बजट जारी करना पड़ रहा है।