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नई के साथ पुरानी योजनाओं के लिए इस बार ज्यादा बजट की आस

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लखनऊ। प्रदेश सरकार के बजट से नगर निगम को काफी उम्मीदें हैं। यह पूरी हुईं तो शहर की खराब सड़कें चकाचक हो जाएंगी। सीमा विस्तार के बाद आए नए इलाकों में सफाई आदि के लिए कर्मचारी लगाए जा सकेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने पर काम के साथ ही झील और तालाबों के पुनरुद्धार पर काम हो सकेगा। कोरोना जैसे महामारी में आई अंतिम संस्कार की समस्या को दूर करने के लिए नए विद्युत शवदाह गृह बनाए जा सकेंगे।
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बजट की तंगी के कारण इस साल शहर की टूटी सड़कों की मरम्मत नहीं करा पाया। वहीं सीमा विस्तार के बाद आए नए 88 गांवों में नगर निगम को ही सड़कों का निर्माण और मरम्मत करनी होगी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नगरीय सड़क योजना और समग्र विकास योजना में सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए बजट प्रदेश सरकार देगी। अब विधानसभा चुनाव आने वाला है। ऐसे में यह उम्मीद और ज्यादा है कि इस बार बजट में विकास के लिए अधिक बजट मिलेगा।
राज्य वित्त से हर महीने 52 करोड़ की उम्मीद
नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी महा मिलिंद लाल का कहना है कि नगर निगम की सीमा विस्तार के बाद अब कर्मचारियों के वेतन पर खर्च बढ़ा है। अभी तक राज्य वित्त मद से हर महीने करीब 42 करोड़ मिलता है। सीमा बढ़ने के बाद अब उम्मीद है कि नए बजट में यह 52 करोड़ हो जाएगा।
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अबकी अवस्थापना मद से 150 करोड़ की आस
पिछले दो साल से नगर निगम को अवस्थापना निधि से पैसा नहीं मिला है। इस पैसे से नगर निगम शहर में विकास कार्य कराता है। इस बार उम्मीद है कि इस बार बजट में करीब 150 करोड़ रुपये का बजट मिलेगा। इसी तरह 15वें वित्त मद से भी 400 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
नए विद्युत शवदाह गृह के लिए भी बजट की उम्मीद
कोरोना लॉकडाउन के समय शहर में एक ही विद्युत शवदाह गृह था। ऐसे में जब कोरोना से मरने वाले को अंतिम संस्कार उसी से करने का नियम आया तो समस्या हुई। लोगों को अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। ऐसे में और विद्युत शवदाह की जरूरत महसूस हुई। उसके बाद गुलालाघाट पर एक और विद्युत शवदाह गृह बनाया गया। शहर के बढ़े दायरे को देखते हुए और शवदाह गृह की जरूरत है। ऐसे में यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस मद में भी सरकार बजट देगी।
शताब्दी वर्ष में खाली हाथ, अब बजट से उम्मीद
लखनऊ। स्थापना के सौ साल पूरे कर चुके लखनऊ विश्वविद्यालय को शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान विशेष पैकेज की उम्मीद थी। विवि के प्रस्ताव पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में लविवि को उम्मीद है कि प्रदेश के बजट में उसे काफी कुछ मिलेगा।
लविवि को सरकारी अनुदान के रूप में सिर्फ 34 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। अनुदान फ्रीज होने की वजह से यहां हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि बजट में उसे काफी सहयोग मिल सकता है। इससे दोनों कैंपस में वाईफ़ाई, एक ऑडिटोरियम, अतिरिक्त क्लास आदि के प्रस्ताव हैं।
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