कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली स्थित लंका मंदिर में बृहस्पतिवार को आनंद बोधी सोसायटी ऑफ श्रीलंका की ओर से वर्षावास पूजन समापन का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रीलंका से आए अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षुओं को चीवरदान किया। इस दौरान समूची तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि के उद्घोष से गुंजायमान रही।
बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्रीलंका गेस्ट हाउस से जुलूस निकाला गया। जो तपोस्थली स्थित गंध कुटी पहुंचा। इस दौरान श्रीलंका से आए 220 सदस्यीय दल ने जेतवन स्थित गंध कुटि पर प्रार्थना की। जुलूस के दौरान अनुयायी बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष कर रहे थे। बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मानव जीवन दुखों से परिपूर्ण है। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना। बुद्ध ने दुख उत्पन्न होने के अनेक कारण बताए। संसार में प्रिय लगने वाली वस्तुओं की इच्छा को त्यागना ही दुख निरोध के मार्ग की ओर ले जाता है। इसके बाद सभी उपासकों ने तपोस्थली स्थित सभा मंडप, आनंद बोधि, कौशांबी कुटी, सूर्यकुंड, शिवली स्तूप, आनंद कुटी, राहुल कुटी व कच्ची कुटी पक्की कुटी आदि का भ्रमण किया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु देइन, बौद्ध भिक्षु यूओबाथा, संघपाल, भिक्षु संघरतन, बौद्ध भिक्षु विमल तिस्स, बौद्ध भिक्षु अशोक, भिक्षु आनंद सागर व देवानंद भंते सहित अन्य उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहीं।