उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आस्था के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 77.40 लाख से अधिक घरेलू पर्यटकों ने प्रदेश के बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया। सारनाथ, कपिलवस्तु, श्रावस्ती और संकिसा के बाद अब कौशांबी बौद्ध श्रद्धालुओं की पहली पसंद बन गया है। वर्ष 2025 में प्रदेश का बौद्ध सर्किट श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा केंद्र बना।
राज्य के 12 पर्यटन सर्किटों में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पर्यटन विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और विभिन्न परियोजनाओं से पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं का विकास भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। बुद्ध की नगरी के रूप में प्रसिद्ध कौशांबी ने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित किया है।
कब कितने बौद्ध पर्यटक कौशांबी आए
भगवान बुद्ध ने अपना छठा और नौवां वर्षावास यहीं व्यतीत किया था। उन्होंने यहां कई महत्वपूर्ण उपदेश भी दिए थे। आज भी यहां प्राचीन स्तूप, विहार और बौद्ध कालीन अवशेष मौजूद हैं। कौशांबी में श्रीलंका और कंबोडिया की सरकारों ने भगवान बुद्ध का मंदिर बनवाया है। वर्ष 2025 में 32.54 लाख, 2024 में 24.72 लाख, 2023 में 12.52 लाख और 2022 में 7.23 लाख बौद्ध पर्यटक कौशांबी आए थे।
23 करोड़ से बुद्ध थीम पार्क का निर्माण
बुद्ध भूमि कौशांबी की आध्यात्मिक पहचान को बढ़ाने के लिए एक बुद्ध थीम पार्क बन रहा है। पर्यटन विभाग इसे कोसम इनाम गांव में बनवा रहा है। इस पार्क में भगवान बुद्ध के जीवन और संदेश को आकर्षक मूर्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। करीब 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 22.93 करोड़ रुपये की लागत से यह पार्क बन रहा है। इसे साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। बुद्ध थीम पार्क को तेलंगाना के नागार्जुन सागर स्थित बुद्धवनम की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
77.40 लाख घरेलू और 4.42 लाख विदेशी पर्यटक शामिल
प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर साल दर साल पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में सारनाथ, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, संकिसा, कौशांबी और कुशीनगर में 81.82 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। इनमें 77.40 लाख घरेलू और 4.42 लाख विदेशी पर्यटक शामिल थे। वर्ष 2024 में कुल 61.47 लाख पर्यटक थे, जिनमें 57.94 लाख घरेलू और 3.53 लाख विदेशी पर्यटक थे।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में बौद्ध पर्यटन स्थलों पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से काफी काम व सुविधाएं विकसित की गई हैं। साल दर साल यह देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। यह स्थानीय लोगों को रोजगार देने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं।