बसपा सुप्रीमो मायावती लखनऊ में यूपी और उत्तराखंड स्टेट यूनियन की बैठक की और फैसला किया कि इस बार निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ा जाएगा। मायावती ने लखनऊ में बैठक के दौरान पार्टी संगठन के कार्यों की समीक्षा की साथ ही कार्यकर्ताओं को पार्टी का जनाधार मजबूत करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मायावती ने इस बैठक के दौरान कहा, बसपा मूवमेंट के सामने जो नई चुनौतियां हैं उनका मुकाबला नई रणनीति के साथ-साथ नई ऊर्जा के साथ भी करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वैसे तो बसपा यूपी में काफी मजबूत है लेकिन चुनावी सफलता आशा और तैयारी के अनुरूप न मिल पाने के कारण साम्प्रदायिक व जातिवादी ताकतों की बांछें खिली हैं।
मायावती ने कहा कि विरोधी तरह-तरह की अफवाहें फैला कर बीएसपी के लोगों का मनोबल गिराने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं ईवीएम धांधली से बचने के लिए झूठी बातें भी फैला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बीजेपी आरएसएस के साथ मिलकर साम, दाम, दंड, भेद के हथकंडों को अपना रही है जिससे लोकतंत्र को खतरा पैदा हो गया है। अगर देश का संविधान और लोकतंत्र सही मंशा में जिंदा नहीं रहेगा तो दलितों, पिछड़ों के लिए सत्ता के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे और लोग फिर से लाचार और मजलूम बनकर रह जाएंगे।
मायावती ने यूपी में जल्द होने वाले शहरी निकाय चुनाव के संबंध में भी मंथन किया और फैसला लिया कि इस बार चुनाव पार्टी के सिंबल पर लड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि शहरी क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार ज्यादा नहीं है लेकिन पिछले चुनाव में शहरी क्षेत्र में भी पार्टी का जनाधार बढ़ने को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है।
बता दें कि मायावती ने विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल की कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को उन्होंने जिला संगठन को छोड़कर मंडल व जोनल स्तर पर नियुक्त कोऑर्डिनेटरों व विभिन्न स्तर पर गठित भाईचारा कमेटियों को भंग कर दिया। अब यहां नए सिरे से संगठन खड़ा किया जाएगा।