बसपा ने स्नातक व शिक्षक कोटे की 11 सीटों के चुनाव के लिए अब तक किसी तरह की तैयारी शुरू नहीं की है। इससे एक बार फिर इन चुनावों से बसपा के बाहर रहने की संभावना है। निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में विधान परिषद के शिक्षक व स्नातक कोटे की 11 सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। बृहस्पतिवार से दावेदारों का नामांकन भी शुरू हो गया।
सपा व कांग्रेस ने प्रत्याशियों का एलान भी शुरू कर दिया है। पर बिना समीकरण राज्यसभा चुनाव में ताल ठोककर सीट जीतने वाली बसपा के खेमे में एमएलसी चुनाव को लेकर किसी तरह की हलचल नहीं है। बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि एमएलसी चुनाव एक विशेष दायरे से जुड़े मतदाताओं से होता है जिनमें दलित, पिछड़े व अल्पसंख्यकों की तादात बहुत कम होती है।
आम मतदाता की भी इसमें कोई भूमिका नहीं रहती। ऐसे में बसपा का प्रतिबद्ध मतदाता इसमें रुचि नहीं लेता। इसी वजह से पार्टी स्नातक व शिक्षक कोटे की सीटों पर पूर्व में भी चुनाव नहीं लड़ती रही है। जब बसपा अपने बलबूते सत्ता में थी, तब भी आधिकारिक तौर पर इन चुनावों में प्रत्याशी नहीं उतारा था। पार्टी स्थानीय निकाय के एमएलसी चुनाव जरूर लड़ती है। पदाधिकारी ने बताया कि स्नातक व शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर नेतृत्व ने इस बार अब तक किसी तरह की तैयारी का निर्देश नहीं दिया है। ऐसे में इस चुनाव में पार्टी के मैदान में उतरने की संभावना नहीं है। राज्यसभा चुनाव के तत्काल बाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारी पर पूरा फोकस शुरू कर दिया है।