विधान परिषद की 10 सीटों के लिए समाजवादी पार्टी में जोड़-तोड़ तेज हो गई है। ये सीटें नामित सदस्यों का 25 मई को कार्यकाल पूरा होने पर खाली हो रही है। इनमें बसपा के आठ और सपा के एक विधान परिषद सदस्य हैं।
एक सीट पहले से खाली चल रही है। इन सभी पर सपा से जुड़े नेताओं का चुना जाना तय माना जा रहा है। नए नामित सदस्यों के आते ही उच्च सदन में बसपा का पूर्ण बहुमत का रुतबा खत्म हो जाएगा।
विधान परिषद में कुल 100 सदस्य होते हैं। इस समय बसपा के 54, सपा के 26, भाजपा के 7, शिक्षक दल के पांच, कांग्रेस के दो, रालोद का एक और चार निर्दलीय सदस्य हैं। एक स्थान खाली है। 25 मई को जिन नौ सदस्यों का कार्यकाल पूरा होगा, उनमें आठ बसपा के हैं।
चूंकि सपा नेताओं को ही विधान परिषद सदस्य नामित किया जाना है इसलिए इनके लिए जोड़तोड़ तेज हो गई है। ऐसे कई नेता विधान परिषद में पहुंचने की दावेदारी कर रहे हैं जो पहले मंत्री रह चुके हैं या लोकसभा या फिर विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं।
अभी तक ये रहा है बसपा का रवैया
पार्टी संगठन से जुड़े कुछ लोग और युवा नेता भी उच्च सदन में एंट्री की कतार हैं। पिछले विधान परिषद चुनाव में ऐन वक्त पर टिकट से वंचित हुए नेता भी अपने पक्ष में लामबंदी में जुटे हैं। जातीय और क्षेत्रीय आधार पर भी दावेदारी की जा रही है।
विधान परिषद सदस्य नामित होते ही अगले महीने उच्च सदन के समीकरण भी प्रभावित होंगे। विधान परिषद में अभी तक बसपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त था। 54 सदस्यों के बल पर बसपा परिषद में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाती रही है।
वह अकेले दम पर विधानसभा में पारित कई विधेयक विधान परिषद से वापस लौटा देती। पर अगले सत्र में यह स्थिति नहीं रह पाएगी। बसपा के आठ सदस्यों का कार्यकाल खत्म होते ही परिषद में उसकी सदस्य संख्या 46 रह जाएगी।
वहीं एक खाली सीट को मिलाकर सपा के 26 से बढ़कर 35 सदस्य हो जाएंगे। वर्तमान में सपा के नामित बनवारी सिंह यादव का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है।
इनका खत्म हो रहा कार्यकाल:
बसपा के कमलकांत गौतम, डॉ. गोपाल नारायण मिश्र, नौशाद अली, एमएल तोमर, डॉ. मेघराज सिंह, रामचंद्र सिंह प्रधान, विनय शाक्य, शिवबोध राम और सपा के बनवारी सिंह यादव। एक स्थान रिक्त है।