विधानसभा से पहले बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता रामलला के दरबार पहुंच गए। बसपा ने भगवा दुर्ग में सेंध लगाने का आगाज शुक्रवार को रामजन्मभूमि में रामलला का पूजन-अर्चन कर किया। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहली बार बसपा के बड़े नेताओं का काफिला रामजन्मभूमि पहुंचा है। इसे ब्राह्मण मत सहेजने का दांव माना जा रहा है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्र ने रामलला, हनुमानगढ़ी सहित मां सरयू की पूजा की तो इसके पीछे ब्राह्मणों को रिझाने की कोशिश साफ नजर आई।
यूपी की सत्ता में एक बार फिर वापसी की आस संजोए बसपा ब्राह्मणों के सहारे बड़ा दांव लगा रही है। राम की धरती से ब्राह्मण सम्मेलन का आगाज कर बसपा ने यही संदेश देने का प्रयास किया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा शुक्रवार को ब्राह्मण सम्मेलन के लिए अयोध्या पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। बाद में हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा। साथ ही साथ 100 लीटर दूध से मां सरयू का दुग्धाभिषेक कर आरती उतारी। यह पहली बार है जब बसपा ने रामनगरी में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया। इसको राजनीति से जोड़ने के सवाल पर सतीश मिश्रा ने कहा कि जो धर्म की राजनीति करते हैं उनकी सोच होती है कि वह कौन सा कार्यक्रम करें, कौन सा नहीं। हम भगवान राम, शिव, कृष्ण सब पर आस्था रखते हैं। अफसोस होता है कि जब लोग भगवान राम को राजनीति में लाते हैं। हम किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। सर्वसमाज व जनता के साथ गठबंधन करके अकेले दम पर चुनाव लड़ेंगे। इस बयान के जरिए बसपा ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव को लेकर वह अपने पत्ते अभी खोलना नहीं चाहती है।
कहा, खुशी दुबे के साथ अन्याय हो रहा है
खुशी दुबे मामले के बहाने उन्होंने ब्राह्मणों को रिझाने का दांव भी चला। सतीश मिश्रा ने कहा कि ब्राह्मणों का उत्पीड़न सबसे ज्यादा भाजपा सरकार में हुआ है। खुशी दूबे के साथ अन्याय हो रहा है, एक दिन की ब्याहता की कानूनी स्तर पर हर संभव मदद की जाएगी। फिलहाल अयोध्या में दर्शन-पूजन व ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए बसपा ने अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट कर दी है।
रामनगरी के संतों को साधने की दिखी कोशिश
अयोध्या में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कई संतों से आशीर्वाद लिया। रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास, जगन्नाथ मंदिर के महंत राघव दास, महंत संजय दास सहित कई संतों ने सतीश मिश्रा का स्वागत किया। अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास से भी आशीर्वाद लिया। संजय दास ने उनका स्वागत सम्मान किया। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी सभी भक्तों की है, जो भी यहां आएगा, हम सभी का स्वागत करते हैं। हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं है। वे नियमित पूजा-पाठ करने वाले लोगों में से हैं और बड़ी संख्या में लोगों का नेतृत्व करते हैं, इसलिए हमने उनका स्वागत किया।
पुजारी से पूछा, कैसा चल रहा राममंदिर का निर्माण
रामलला के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भी सतीश मिश्रा को रामलला का चित्र भेंटकर स्वागत किया। सत्येंद्र दास ने कहा कि पहली बार है जब बसपा का काफिला रामलला के दरबार पहुंचा है। बसपा नेता ने उनसे पूछा कि राममंदिर निर्माण कैसा चल रहा है, वे देखना भी चाहते थे, लेकिन सुरक्षा मानकों के चलते नहीं देख सके।