सीतापुर में भड़काऊ भाषण देने के बाद पार्टी से बाहर किए गए आकाश ने अपने संबोधन में परिपक्वता दिखाई। उन्होंने किसी भी दल या उसके नेता पर निशाना नहीं साधा और अपना भाषण कांशीराम और मायावती तक ही सीमित रखा। बता दें कि आकाश बुधवार सुबह राजधानी आ गए थे और रैली की तैयारियों की कमान संभाल ली थी। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा भी रैली की तैयारियों में जुटे थे। उन्हें भी जल्द कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
वहीं मायावती ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष दलों की रैलियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमने दूसरे दलों की तरह मजदूरी देकर दिहाड़ी पर लोगों को नहीं बुलाया है। लोग खुद चंदा जुटाकर अपनी बहन को सुनने के लिए यहां आए हैं। वहीं अपने भाई आनंद कुमार के लिए कहा कि वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के साथ मेरी गैर-मौजूदगी में दिल्ली में सारा कामकाज संभालते हैं। वहीं अन्य राज्यों से आए लोगों के लिए कहा कि उन्हें बुलाया नहीं गया था, इसलिए छिपकर बैठे हैं कि कहीं मैं नाराज न हो जाऊं। मैं नाराज नहीं हूं। उन्होंने यहां जो सीखा और देखा, उसे अपने राज्य में जाकर बताएं ताकि मेरे वहां आने पर इसी तरह का आयोजन हो सके।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
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उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इमरजेंसी के वक्त बाबा साहेब के बनाए संविधान को प्रभावहीन बनाने वाली पार्टी के लोग संविधान की प्रति हाथ में लेकर किस्म किस्म की नौटंकी करते हैं। इन्होंने कभी बाबा साहब को भारत रत्न नहीं दिया। कांशीराम के देहांत पर कांग्रेस और सपा ने शोक घोषित नहीं किया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं की, जिसे बसपा के प्रयासों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने लागू किया।
कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित रैली में उमड़ी भीड़ ने बसपा का 2012 से पहले की ऐतिहासिक रैलियाें की याद ताजा कर दी, जिसमें लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। बता दें कि सभी राजनीतिक दलों में बसपा ऐसी पार्टी है, जिसकी रैली में सबसे ज्यादा लोग आते हैं। वर्ष 2007 से 2012 के बीच हुई बसपा की रैलियों में 10 लाख से अधिक लोग जुटे थे। मायावती ने वर्ष 2007 में सत्ता प्राप्त प्राप्त करो संकल्प महारैली का आयोजन किया था, जिसके बाद बसपा की बहुमत की सरकार बनी थी। वहीं अगस्त 2008 को सावधान रहो, आगे बढ़ो रैली की थी। इसके बाद 15 मार्च 2010 को कांशीराम के जन्मदिन और बसपा के 25वीं वर्षगांठ पर विशाल महारैली का आयोजन किया था। वहीं 9 अक्टूबर 2012 को रमाबाई मैदान में महासंकल्प रैली की थी।