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सिस्टम 'फॉर्मैट' करने के बाद 'रिकवरी मोड' में माया

Thu, 22 May 2014 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने संगठन को नए सिरे से गठित करने का काम शुरू कर दिया है, इसके पहले उन्होने पार्टी के मौजूदा ढांचे को भंग करने की घोषणा की।
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बुधवार को उन्होंने मंडल स्तरीय समीक्षा शुरू करते हुए संगठन के नए स्वरूप के अनुसार छह मंडलों को दो जोन में बांटते हुए इनके कोआर्डिनेटरों व लोकसभा प्रभारियों की नियुक्ति कर दी।

अन्य मंडलों की समीक्षा का काम गुरुवार व शुक्रवार को भी जारी रहेगा। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मायावती ने मंगलवार को देश भर के जिम्मेदार पदाधिकारियों का राष्ट्रीय सम्मेलन किया था।
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भंग किया पुराना ढांचा

सम्मेलन में संगठन के मौजूदा ढांचे को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया गया था।

बुधवार से बसपा अध्यक्ष ने भंग संगठन के कोआर्डिनेटरों, लोकसभा व विधानसभा का चुनाव लड़े प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों के साथ हार के कारणों की मंडल स्तरीय विस्तृत समीक्षा शुरू की।

पहले दिन लखनऊ, फैजाबाद, इलाहाबाद, कानपुर, चित्रकूट व झांसी मंडल की समीक्षा की।

आमतौर पर यह बात सामने आ रही है कि पार्टी में जिम्मेदार भूमिका में रहे कई नेताओं ने नेतृत्व को जमीनी हालात की सही जानकारी नहीं दी। वे हवा का रुख भांपने में नाकाम रहे।

कहां-कौन जोन कोआर्डिनेटर

मायावती ने लखनऊ, फैजाबाद व इलाहाबाद मंडल के जिलों को मिलाकर पहला जोन गठित किया। पूर्व मंत्री आरके चौधरी, निवर्तमान कोआर्डिनेटर अखिलेश अंबेडकर व एमएलसी आरएस कुशवाहा को संयुक्त रूप से इस जोन का कोआर्डिनेटर नियुक्त किया गया।

कानपुर, चित्रकूट व झांसी मंडल को मिलाकर दूसरा जोन बनाया। एमएलसी तिलकचंद अहिरवार, कमलेश भारती और एमएलसी नौशाद अली इस जोन के कोआर्डिनेटर होंगे।

मायावती ने अपने स्तर से ही हर जिले में 12-12 लोकसभा प्रभारियों की भी नियुक्ति की है। इसमें सर्वसमाज को जोड़ने की मजबूत पहल करते हुए रणनीति के तहत दलित, पिछड़ा वर्ग, अपर कास्ट, अल्पसंख्यकों को भागीदारी दी है।

नव नियुक्त जोन कोआर्डिनेटरों को जिला, विधानसभा, सेक्टर व बूथ स्तर तक के संगठन के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा यह बात भी तय हो गई है कि विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी अब कोआर्डिनेटर की भूमिका में नहीं रहेंगे। वह विधानसभा संयोजक के रूप में काम करेंगे।
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निराश न होने की अपील भी

मायावती ने समीक्षा के दौरान लोकसभा चुनाव में पार्टी की चौंतीस सीटों पर नंबर दो की पोजीशन, 20 प्रतिशत के वोट शेयर और देश के तीसरे प्रमुख राष्ट्रीय दल का हवाला देते हुए नेताओं को नतीजों से हतोत्साहित न होने की अपील की।

बसपा अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की कोशिश करते हुए कहा कि पार्टी में मिशनरी भावना से काम करने वाले काडर को तैयार किया जाएगा।

चुनाव में हार के लिए उन्होंने विपक्षी दलों की अंदरूनी मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया।
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