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सपा के बागियों की पहली पसंद बनी बसपा: अखिलेश के खास अब्बास अली रुश्दी भी हुए हाथी पर सवार

Sat, 12 Feb 2022 05:29 AM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सपा से टिकट न मिलने पर बागी बने नेता पार्टी के लिए चुनौती बन गए हैं। पश्चिम के बाद अब मध्य यूपी, बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के बागियों की पहली पसंद बसपा बन गई है। सपा से टिकट नहीं मिलने पर वे बसपा के द्वार पर दस्तक दे  रहे हैं। यहां से निराश होने पर ही वे भाजपा या कांग्रेस में जुगाड़ लगा रहे हैं। पश्चिम के बाद अब मध्य यूपी, बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। अलग-अलग इलाके में ये बागी सपा के लिए चुनौती बन गए हैं।

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समाजवादी पार्टी में चुनाव से ठीक पहले भाजपा और बसपा के कई नेता शामिल हुए। सपा ने इनमें से ज्यादातर को जिताऊ उम्मीदवार मानते हुए टिकट भी दे दिया है। इसका साइड इफेक्ट भी अब सामने आ रहा है।  मध्य, अवध और पूर्वांचल में उम्मीदवारों की घोषणा होते ही सपा के कई पुराने नेता बागी हो गए। ज्यादातर बागी नेता बसपा से टिकट पाने में कामयाब रहे। कई सीटों पर बसपा से मैदान में उतरे बागी सपा से सीधा मुकाबला करते भी दिख रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अयोध्या के रुदौली से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी रुश्दी मियां ने सपा से इस्तीफा दे दिया है। वह बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। बीकापुर से सपा नेता अनूप सिंह ने निर्दलीय पर्चा भर दिया है।

टांडा में शबाना खातून को टिकट नहीं मिला, तो वह बसपा से मैदान में उतर गईं। मड़ियांहू में सपा ने पूर्व विधायक श्रद्धा यादव को टिकट देने के बजाय बसपा से आईं मुंगरा बादशाहपुर की विधायक सुषमा पटेल को मैदान में उतार दिया। ऐसे में श्रद्धा भी बागी हो गई हैं। वह भी बसपा या निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। महोबा में पूर्व विधायक सिद्ध गोपाल साहू का टिकट कटा तो उनका भाई संजय साहू बसपा से मैदान में उतर गया है। उतरौला से पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी का टिकट काट दिया है। यहां हसीब हसन को मैदान में उतारने से वह नाराज हैं और चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। तुलसीपुर से मसूद आलम खां को टिकट दिया गया है। इससे जेल में बंद रिजवान जहीर का खेमा नाराज है। इनके भी चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है।
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भाजपा व कांग्रेस से भी उतरे मैदान में : श्रावस्ती से टिकट मांग रहे पूर्व विधायक मो. रमजान को मटेरा से उम्मीदवार बनाया गया, तो उन्होंने टिकट लौटा दिया। वह कांग्रेस के टिकट पर श्रावस्ती से मैदान में उतर गए। सपा से टिकट नहीं मिलने पर हमीरपुर में मनोज प्रजापति भाजपा के उम्मीदवार बन गए हैं। अमेठी में सपा ने पहले रचना कोरी को टिकट दिया, फिर विमलेश पासी को मैदान में उतार दिया। इससे खिन्न रचना कोरी भाजपा में शामिल हो गई हैं। सुल्तानपुर इसौली से टिकट नहीं मिलने पर बीएम यादव ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।

सपा से स्वामी तो बसपा से इलियास : फाजिलनगर सीट पर सपा ने भाजपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य को मैदान में उतारा, तो सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इलियास अंसारी बागी हो गए हैं। उन्होंने बसपा से नामांकन किया है। इलियास अब सपा और अखिलेश यादव पर जमकर बरस रहे हैं। इलियास अंसारी पिछले 30 साल से समाजवादी पार्टी की सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे हैं।

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मध्य में भी कई सीटों पर घेरेबंदी

मुरादाबाद देहात से सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी टिकट कटने के बाद कांग्रेस से और कुंदरकी विधायक हाजी रिजवान बसपा से मैदान में हैं। शाहजहांपुर से विधायक शरदवीर सिंह टिकट कटने पर भगवा खेमे से ललकार रहे हैं। फिरोजाबाद सदर से टिकट नहीं मिलने पर अजीम की पत्नी साजिया हसन बसपा से मैदान में हैं। सपा के पूर्व विधायक ओमप्रकाश टिकट कटने के बाद शिकोहाबाद से भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। फर्रुखाबाद में सात बार के विधायक नरेंद्र सिंह यादव ने सपा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अमृतपुर से निर्दलीय ताल ठोक दी है। एटा के पूर्व विधायक अजय यादव भी हाथी पर सवार होकर चुनावी समर में कूद पड़े हैं।
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