जब दूसरे दल अंबेडकर से लेकर रविदास तक के बहाने सूबे के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, बसपा ने मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है।
पिछले तीन महीने के भीतर पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी बदले हैं। इनमें कई पिछड़ों की जगह मुस्लिमों को मौका दिया गया है। बताया जा रहा है कि बसपा करीब 100 मुस्लिम प्रत्याशियों के साथ 2017 की जंग में उतरने की तैयारी कर रही है। बसपा की कोशिश दलित-मुस्लिम के सहारे विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की है।
बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी दावा करते हैं कि भाजपा, सपा और कांग्रेस लाख कोशिश कर ले, दलित पार्टी से छिटकने वाले नहीं हैं।
पार्टी की पूरी कोशिश सर्वसमाज में आधार बढ़ाने के साथ मुसलमानों को जोड़ने की है। मुसलमान सपा से खासा नाराज है। उससे किए वादे पूरे नहीं हुए हैं। वह समझ गया है कि उसे छला गया है।
...तो मुसलमान सपा की प्राथमिकता में ही नहीं
जिला पंचायत अध्यक्ष और एमएलसी चुनाव में भी उसने देख लिया कि मुसलमान सपा की प्राथमिकता में नहीं है।
75 जिला पंचायत अध्यक्षों में सिर्फ 2 तो 36 एमएलसी में सिर्फ 4 मुसलमानों को ही मौका दिया। दूसरा, मुसलमान सपा से नाराज होने पर बसपा को स्वाभाविक पसंद मानता है।
अगर, उसे अपने वर्ग का प्रत्याशी भी मिल जाए, तो उसके जुड़ने की संभावना और बढ़ जाती है। इस समीकरण और 2017 में हर कीमत पर जीत को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने हाल में विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों का आकलन किया है।
कई जगह प्रभारी बदले गए हैं और जीत की संभावना वाले नए मुस्लिम प्रभारी बनाए गए हैं। रणनीति के तहत प्रभारियों में फेरबदल चल रहा है।
2012 में 85 सीटों पर दिया गया था मौका
बसपा नेता ने बताया कि पार्टी ने 2012 में 85 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। इस बार यह संख्या 100 पहुंच सकती है।
पिछली बार अन्य वर्गों के साथ मुस्लिम भी गुमराह हुए थे और काफी संख्या में सपा के साथ चले गए थे। इस बार उन्हें और ज्यादा मौका दिया जा रहा है, वे पूरी ताकत के साथ बसपा के साथ जुड़ रहे हैं।
अयोध्या और गौरा में बने मुस्लिम प्रभारी
बसपा सुप्रीमो की अनुमति के बाद हाल ही फैजाबाद जिले के अयोध्या में पिछड़ा वर्ग के जयकरन वर्मा के स्थान पर बज्मी सिद्दीकी और गोंडा के गौरा में प्रभात वर्मा के स्थान पर अब्दुल कलाम को प्रभारी बना दिया गया। प्रभात को-ऑर्डिनेटर रह चुके हैं।
बहराइच के सात विधानसभा क्षेत्रों में से तीन और सीतापुर के नौ में से तीन के मुस्लिम प्रभारी हैं। बलरामपुर के चार विधानसभा क्षेत्रों में दो और गोंडा में सात में चार मुस्लिम प्रभारी बनाए गए हैं।