बसपा ने सपा पर प्रदेश की 16 पिछड़ी जातियों के साथ धोखा करने का आरोप
लगाया है।
उसने कहा है कि वह पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल
कराने का नाटक कर रही है। किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का
अधिकार संसद के पास है।
बसपा सुप्रीमो मायावती संसद के भीतर और बाहर इसकी
लड़ाई लड़ रही हैं। सपा की पिछली सरकार ने 2003 से 2007 के बीच भी इन
वर्गों का भारी नुकसान किया था। इसलिए इस समाज के लोगों को सपा से सजग रहने
की जरूरत है।
बसपा राज्य कार्यालय से जारी
बयान में कहा गया है कि 2003 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने एक सोची समझी
साजिश के तहत 12 पिछड़ी जातियों कहार, केवट, कुम्हार, धीवर, बिंद, राजभर,
धीमर, बाथम, तुरहा, गौंड़, मांझी व मछुआ जातियों को एक अधिसूचना से
अनुसूचित जाति वर्ग घोषित कर दिया था।
जबकि यह राज्य सरकार के अधिकार
क्षेत्र में नहीं आता। संविधान की धारा 341, 342 व न्यायालय के विभिन्न
आदेशों से यह अधिकार संसद के पास है। इसके चलते ही सपा सरकार के इस फैसले
पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।