चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद बसपा के लिए अब भी तूफान थमा नहीं है। मायावती द्वारा किये गए परिवर्तन के बाद अब पार्टी कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर कांग्रेस में शुरू हुई बगावत का असर अब धीरे-धीरे बसपा में भी दिखने लगा है।
यही कारण है कि बसपा के तीन दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत बसपा सुप्रीमो मायावती को पत्र भेजकर की है।
जिसमें पार्टी के कुछ पदाधिकारियों पर चापलूसी का आरोप लगाते हुए उनकी ऊल-जुलूल हरकतों से पार्टी की छवि खराब होने का जिक्र किया गया है।
माया ने किये थे परिवर्तन
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सूबे के अलग-अलग जिलों में गठित बसपा की सभी कार्यकारिणी भंग कर दी हैं।
ऐसे में पार्टी के भीतर चल रहा अंतर्द्वंद्व अब पुराने कार्यकर्ताओं में विरोध पैदा करने लगा है।
जिसे लेकर बसपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता राजकुमार गौतम, हरविंद गौतम, डॉ. अनिल कुमार कनौजिया, रामगोपाल मौर्य सहित दर्जनों अन्य कार्यकर्ताओं ने पार्टी सुप्रीमो मायावती को पत्र भेजकर उन्हें अपनी पीड़ा बताई है।
ये हैं शिकायतें
नाराज कार्यकर्ताओं ने पत्र में लिखा है कि वे सभी लोग सन् 1986 में जब कांशीराम का आगमन गोंडा में हुआ था, तब से बसपा में हैं और लगातार पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
बीते लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पार्टी सुप्रीमो से मिले निर्देशों के तहत गांव-गांव जाकर प्रचार-प्रसार किया। लेकिन इसके बाद भी कुछ चापलूस किस्म के पदाधिकारियों ने उनकी उपेक्षा की।
यही नहीं उन लोगों ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की जगह अपने स्तर से खुद के लेटरपैड जारी कर अपने लोग खड़े कर दिए। जिससे पार्टी की होने वाली बैठकों और कार्रवाई की सूचना से उनको वंचित रखा गया और वर्तमान में भी इसकी कोई सूचना उन्हें नहीं दी जा रही।
पार्टी में हावी है गुटबाज़ी
अपने पत्र में कार्यकर्ताओं ने जिक्र किया है कि पार्टी में गुटबाजी लगातार बढ़ती जा रही है और जिसका सीधा असर पार्टी की छवि पर भी पड़ रहा है।
इन कार्यकर्ताओं ने पार्टी सुप्रीमो से योग्यता व वरिष्ठता के आधार पर कार्यकर्ताओं की खुली बैठक कर पदाधिकारी नियुक्त करने की मांग की है।
बता दें कि इसी तरह की गुटबाजी को लेकर कांग्रेस में भी बीते दिनों कई बखेड़े खड़े हो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 16 मई को आए लोकसभा चुनाव में बसपा प्रदेश में एक भी सीट जीत पाने में नाकाम रही है। जिससे कि पार्टी के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। चुनाव परिणाम के बाद मायावती ने कई बैठकें कर पार्टी में बदलाव किए।