याची के वकील ने दलील दी कि याची को फर्जी तरीके से फंसाया गया है। हालांकि, वकील ने माना कि याची ने फेसबुक पर काजोल शर्मा वाले अकाउंट पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। बाद में यह पाया गया है कि वह अकाउंट पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक सदस्य का था, जिसे फेक नाम से चलाया जा रहा था। वकील ने कहा, याची ने उस अकाउंट में कोई गोपनीय सूचना नहीं भेजी।
सरकारी वकील एसएन तिलहरि ने जमानत का विरोध किया। कहा, इस मामले की जांच में पाया गया था कि आरोपी 21 जनवरी 2016 से 21 जनवरी 2018 के दौरान फेसबुक पर काजोल से लगातार चैटिंग कर रहा था।
इस दौरान उसे तैनाती के स्थल, वाहिनी मुख्यालय, ट्रेनिंग क्षेत्र, फ्रंटियर व सेक्टर मुख्यालय के साथ ही 15 अगस्त को हुए सैनिक सम्मेलन की जानकारी, फोटो व वीडियो क्लिप भेजी थी। इसकी पुष्टि फोरेंसिक लैब की जांच में हो चुकी है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी।