बेसिक शिक्षा विभाग में 35-40 साल की सेवा के बाद मिलने वाली पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का भुगतान लेने के लिए 2 से 10 प्रतिशत रिश्वत का खेल चलता है। बीएसए कार्यालय से लेकर कोषाधिकारी कार्यालय तक की मिलीभगत से चल रहे इस खेल में जो शिक्षक या कर्मचारी रिश्वत देते हैं, उन्हें समय पर भुगतान मिलता है, वरना भुगतान के लिए महीनों तरसना पड़ता है।
कोषाधिकारी पर भी कसी जाए लगाम
शिक्षकों और कर्मचारियों के पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण का समय पर भुगतान कराने के लिए कोषाधिकारी पर भी लगाम कसनी जरूरी है। ऐसे अनेक मामले हैं जब शासन या निदेशालय के दबाव में बीएसए फाइल को कोषालय भेज देते हैं, लेकिन कोषाधिकारी कार्यालय में फाइल धूल खाती रहती है।