श्याम बहार गुटखा कंपनी के मालिक संजीव मिश्रा की करोड़ों की संपत्तियां बेचने के आरोपी उनके छोटे भाई राहुल मिश्रा को मंगलवार देर शाम वजीरगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ सआदतगंज और अलीगंज थाना से दो गैर जमानती वारंट जारी थे। फर्जीवाड़े में उसके साथ शामिल सुबोध मिश्रा और मालती मिश्रा की तलाश की जा रही है।
प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह ने बताया कि वजीरगंज निवासी श्याम बहार गुटखा कंपनी के मालिक संजीव मिश्रा ने 11 फरवरी 2014 को लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। इसके बाद छोटे भाई राहुल ने सुबोध मिश्रा व मालती मिश्रा की मिलीभगत से फर्जी वसीयत बना ली।
इस वसीयत को रजिस्ट्रार ऑफिस के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से असली साबित करा लिया। यही नहीं फर्जी वसीयत को निबंधक कार्यालय के अभिलेखों में शामिल करा दिया। इसके बाद सबने मिलकर संजीव की बेशकीमती संपत्तियों को बेचना शुरू कर दिया।
संजीव की पत्नी इटावा निवासी मीनाक्षी की शिकायत पर हुई जांच में वसीयत को फर्जी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर 27 जून 2016 को वजीरगंज कोतवाली में राहुल मिश्रा, सुबोध मिश्रा और मालती मिश्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कराया गया था।
संबंधित न्यायालय ने तीनों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके अलावा सआदतगंज और अलीगंज थाना से भी राहुल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।
कानपुर से कोलकाता तक की संपत्तियां बेचने का आरोप
संजीव की पत्नी मीनाक्षी मिश्रा का आरोप है कि उनके देवर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर पति की लखनऊ के अलावा कानपुर से कोलकाता तक की करोड़ों रुपये की संपत्तियां बेच डालीं। लखनऊ में आईआईएम रोड स्थित रायपुर और मुतक्कीपुर गांव की काफी जमीन के साथ ही अलीगंज के बी ब्लॉक स्थित आलीशान मकान व अन्य कई मकान बेचे।
गुटखा कंपनी का ट्रेडमार्क भी हड़पा
राहुल मिश्रा ने अपने भाई की गुटखा कंपनी श्याम बहार का ट्रेडमार्क भी हड़प लिया था। मीनाक्षी का आरोप है कि उसने फर्जी हलफनामा बनाकर उसके पति की कंपनी का ट्रेडमार्क हड़प लिया। इस मामले में भी वजीरगंज कोतवाली में एक मामला दर्ज है।
आरोपी को छुड़ाने के लिए रातभर दबाव बनाते रहे वकील
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आरोपी राहुल मिश्रा को छुड़ाने के लिए काफी सिफारिश और पैरवी आई। रात एक बजे तक वकीलों का कोतवाली में जमावड़ा लगा रहा। वकीलों ने राहुल को छुड़ाने की काफी कोशिश की। उन्होंने दबाव डाला लेकिन पुलिस ने एक न सुनी।