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Lucknow Blood Bank Fraud: सुनो दो हजार लगेंगे... निकलवा देंगे नए लड़कों का खून, किराए पर बुलाते पेशेवर डोनर

Tue, 14 Jan 2025 09:05 AM IST
भूपेन्द्र सिंह हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Lucknow Blood Bank news: निजी ब्लड बैंक में रक्तदान के लिए दलाल ने डोनर की बोली लगाई। यहां रक्तदान शिविर में पेशेवर रक्तदाता आते हैं। महंगी दर पर खून बेचने के साथ ही गुणवत्ता से खिलवाड़ हो रहा है। ड्रग व स्वास्थ्य विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं।  
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रक्तदान// खून का सौदा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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Blood Bank Fraud: राजधानी लखनऊ में खुले चैरिटेबल ब्लड बैंकों की मॉनिटरिंग न होने से खून की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल निजी ब्लड बैंकों के रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में पेशेवर डोनर ही खून देते हैं। इसके एवज में उन्हें निर्धारित रकम दी जाती है। खून के दलाल पेशेवर डोनर का इंतजाम करवाते हैं। रक्तदान शिविर के लिए बाकायदा डोनर की बोली लगती है।

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इस तथ्य की पड़ताल के लिए अमर उजाला संवाददाता हिमांशु अवस्थी ने पेशेवर डोनर उपलब्ध कराने वाले एक दलाल का मोबाइल नंबर हासिल किया। खुद को निजी ब्लड बैंक का मैनेजर बताते हुए बात की। 

विश्वास दिलाया कि हमारे निजी ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर लगना है। इसके लिए रक्तदाताओं की जरूरत है।बातचीत में दलाल ने रक्तदान कराने का ठेका ले लिया। इसके लिए खून देने वाले लड़कों की कीमत भी बताई। बातचीत में जो सच सामने आया, वो हैरान करने वाला है। 

आप भी पढ़िए मुख्य अंश...

संवाददाता: हैलो... भाई, आप का नंबर मेडिकल कॉलेज से मिला है।
दलाल: हां बताओ, क्या काम है?
संवाददाता: गुडंबा इलाके में हमारा एक ब्लड बैंक है। उसके मैनेजर हैं हम।
दलाल: अच्छा। बताए... क्या करना है?
संवाददाता: अपने यहां ब्लड डोनेशन कैंप लगना है। इसके लिए डोनर की जरूरत है।
दलाल: पैसों पर मिलते हैं डोनर... कितना मिलेगा?
संवाददाता: आप बताओ कितना देना होगा?
दलाल: अभी तक कितना देते रहे हैं आप?
संवाददाता: एक डोनर को हजार, डेढ़ हजार दे देंगे।
दलाल: ठीक है, कुछ लड़के हम भेज देंगे, मगर रेट बढ़ाना होगा।
संवाददाता: कितना रेट बढ़ाना होगा, आप बताओ।
दलाल: दो हजार लगेंगे, नए लड़कों का खून निकलवा देंगे।
संवाददाता: हम्म... अच्छा ठीक है मगर प्रोफेशनल डोनर नहीं होने चाहिए।
दलाल: नहीं... बिल्कुल नए लड़के कैंप में आएंगे।
संवाददाता: कैंप की तारीख तय होते ही हम बताते हैं।
दलाल: ठीक है डेट बताना, हम लड़कों के नंबर भेज देंगे, बात कर लेना।

कैंप की अनुमति देकर झांकने नहीं जाते अफसर

निजी ब्लड बैंक रक्तदान शिविर लगाने की सूचना संबंधित विभाग को भेजते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इन कैंपों की निगरानी नहीं करते। निजी ब्लड बैंक में कैंप लगाने की अनुमति जिला क्षय रोग अधिकारी के जरिये दी जाती है। निगरानी न होने से ब्लड बैंक मनमाफिक डोनर बुलाकर खून लेते हैं।

अनुमति देने का रिकॉर्ड नहीं

बीते साल कितने ब्लड बैंकों को कितने कैंप की अनुमति विभाग ने दी है, इसका भी रिकाॅर्ड अफसरों पास नहीं है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल का कहना है कि उनका विभाग सिर्फ कैंप लगाने की अनुमति देता है। मॉनीटरिंग का काम ड्रग विभाग का है।
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ड्रग विभाग की है गुणवत्ता परखने की जिम्मेदारी 

सहायक मंडल आयुक्त ड्रग ब्रजेश ने बताया निजी ब्लड बैंक में खून की गुणवत्ता की जांच करने का काम ड्रग विभाग का है। खून की गुणवत्ता गड़बड़ होने पर कार्रवाई की जाती है। कैंप लगाने की अनुमति व निगरानी की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
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