प्रदेश के करीब 20 लाख लोगों को बस का सफर कराने वाला उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ‘भ्रष्टाचार निगम’ में तब्दील हो चुका है।
यहां के कार्यकारी मुख्य प्रधान प्रबंधक (सीजीएम) एवं प्रधान प्रबंधक (जीएम) स्तर के अफसर जांच के शिकंजे में फंस चुके हैं।
इनके कारनामे के बाद अब कार्यशाला के सेवा प्रबंधकों पर बस के घटिया स्पेयर पार्ट्स खरीदकर कमीशन खाने का मामला सामने आया है।
सेवा प्रबंधकों के इस धंधे से निगम की बसें आए दिन सड़क पर दम तोड़ रही हैं।
निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम ने परिक्षेत्र के सेवा प्रबंधकों के कमीशनखोरी की पोल खोली है।
प्रबंध निदेशक ने शैक्षिक अवकाश पर विदेश जाने से एक दिन पूर्व 25 अप्रैल को इस कमीशनखोरी, खराब बस के स्पेयर पार्ट्स बेचने एवं आउटसोर्सिंग से जेब भरने के सिलसिले में सेवा प्रबंध से लेकर नोडल अफसर तक को पत्र लिखा है।
पत्र में यह लिखा गया कि घटिया स्पेयर पार्ट्स की खरीद के चलते बसों की यांत्रिक स्थिति में लगातार गिरावट आई है।
इससे सवारियों से भरी बसें बीच सड़क पर दम तोड़ रही हैं। सेवा प्रबंधकों की कमीशनखोरी के चलते बसों के डीजल औसत में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है।
डीजल औसत की आड़ में ड्राइवरों से रिकवरी करते हैं। प्रबंध निदेशक ने सेवा प्रबंधकों को घटिया के बजाय उच्च गुणवत्ता के स्पेयर पार्ट्स खरीदने का निर्देश दिया है।