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एक दिन की रिश्वत के आगे बौने हैं सब घोटाले

Fri, 23 Aug 2013 10:44 AM IST
लखनऊ/अभिषेक यादव/अतुल भारद्वाज/मनीष कुमार सिंह
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देश में हो रहे बड़े-बड़े घोटाले राजनीति का मुद्दा बनते हैं और सुर्खियां भी, लेकिन आम आदमी तो हर रोज ही भ्रटाचार से जूझ रहा है।
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घर से बाहर निकलते ही उसका सामना भ्रष्टाचार से होता है।

हर छोटे-बड़े काम के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। सामान्य कामकाज के लिए सरकारी दफ्तरों में ली जाने वाली यह छोटी-छोटी घूस आम जनता को बड़े घोटालों से ज्यादा भारी पड़ रही है।

एक एनजीओ ने रोजमर्रा के भ्रष्टाचार को उजागर किया तो हमने इसी का आकलन करने के लिए सात विभागों में पब्लिक से जुड़ी करीब 10 सेवाओं का जायजा लिया। तथ्य चौंकाने वाले मिले।
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इन 10 सेवाओं से ही विभाग के कर्मचारी और दलालों का गिरोह रोजाना 30 लाख रुपए का वारा-न्यारा कर रहा है। एक दिन में 29.92 लाख रुपए की कमाई करने वाले इन विभागों के कर्मचारी एक महीने के अंदर 8 करोड़, 97.6 लाख रुपए की काली कमाई करते हैं।

यानी एक साल के अंदर 107.71 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार यहां होता है। यह वह कमाई है जो सीधे जनता की जेब से इनकी जेब में जाती है। रिश्वतखोरों के गिरोह की जड़ें इस कदर गहरी हैं कि आम आदमी उनके दुष्चक्र से बच नहीं पाता।

विभाग: तहसील
समय: दोपहर 1:05 बजे।
पैसे नहीं दोगे तो प्रमाणपत्र का इंतजार ही करिए
जो हमने देखा- काम बताइये? प्रमाण पत्र बनवाना है? काउंटर से बनवाना आसान नहीं होगा। अगर जल्दी चाहिए तो पीछे यादव जी खड़े हैं। उनसे बात कर लीजिए।

अपना नाम सुनते ही काली पैंट और सफेद शर्ट पहने एक सामान्य कदकाठी का व्यक्ति लपका। अगली आवाज उसकी ही थी, हां बताइए कब तक चाहिए आपको प्रमाण पत्र? बस इसकेबाद सुविधा शुल्क तय करने केलिए दलाल से मोलभाव शुरू हो गया।

तहसील में आय और मूल निवास प्रमाण बनवाने के लिए पूछताछ केंद्र की खिड़की पर अमर उजाला टीम को यही नजारा दिखा। यहां रिपोर्टर को दलाल को तलाशना नहीं पड़ा। पहले तो एक महिला दलाल ने खुद ही रिपोर्टर से संपर्क साधा।

मना करने पर वह लौट गई। प्रमाणपत्र जारी करने के लिए बने काउंटर के पूछताछ केंद्र पर मौजूद कर्मचारी से पूछताछ की। जरूरत देखते ही उसने खुद ही दलाल से मिलवा दिया।

दलाल से पूछा गया कि कितना खर्च हो जाएगा? इस पर दलाल ने भी सवाल दागा। पेपर कौन-कौन से हैं आपके पास? पूरी जानकारी लेने के बाद जबाव मिला, दोनों प्रमाणपत्रों का1,000 रुपए लगेगा।

रिपोर्टर ने कहा कि पूछताछ केंद्र पर तो फीस 35-35 रुपए बताई थी। यह तो बहुत ज्यादा है। इस पर दलाल ने तुरंत अपनी गत्ते की फाइल खोलकर उसमें पहले से रखी लोकवाणी की स्लिप दिखा दी।

उनका कहना था कि इसमें ही 20 कार्यदिवस के अंदर प्रमाणपत्र मिलने की बात लिखी है। अगर कोई छुट्टी हो गई तो और ज्यादा देरी हो जाएगी। एक महीना भी लग सकता है और इससे ज्यादा भी।

हमसे बनवाएंगे तो एक से तीन दिन के बीच ही मिल जाएगा। अब पूरा हम ही थोड़े ही अपने पास रखेंगे। स्टाफ को भी तो इसमें से देना होगा। इसमें आपको फॉर्म भी नहीं भरना होगा। आप बस जो भी पेपर हों, अपने साथ ले आना। फोन नंबर देते हुए दूसरे दिन पैसे और पेपर अपने साथ लेकर आने के लिए कहा गया।

विभाग: बिजली
समय: दोपहर 12:30 बजे।
बिना कुछ दिये कनेक्शन नहीं मिलेगा
जो हमने देखा-चिलचिलाती धूप से आने के बाद छांव में खड़े होकर पसीना पोंछते हुए रमाकांत सिंह बताते हैं कि बिजली का कनेक्शन लेने के लिए पिछले एक महीने से दौड़ रहा था।

पैसा नहीं देना चाहता था इसलिए दौड़ता रहा लेकिन कई दिनों के बाद एक कर्मचारी ने बताया कि साढ़े छह हजार रूपए दे दो, वरना दौड़ते रहोगे। खैर जैसे-तैसे मैंने कनेक्शन करा लिया।

अब मीटर लगवाने के लिए दौड़ रहा हूं लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। जब उपकेंद्र पर आओ तो कभी जेई नहीं मिलता तो कभी लाइनमैन नहीं मिलता है।

फोन करो तो बताया जाता है कि एक दो दिन में मीटर लग जाएगा लेकिन महीनों गुजर चुके हैं। आखिर इसके लिए भी कुछ पैसा खर्च करना पड़ेगा तो अब वह भी कर देंगे। यह नहीं किया, तो बिल उल्टा सीधा बिजली का बिल भेजेंगे।

विभाग: पासपोर्ट कार्यालय
समय: दोपहर 2:50 बजे
हजार रुपये दो, पुरानी आईडी हाथ के हाथ लो
जो हमने देखा- पासपोर्ट सेवा केंद्र स्टेशन रोड, अंबेडकरनगर के अली हुसैन पांच कागज लेकर गेट के बाहर काफी देर से टहल रहे थे। पूछने पर पता चला कि उन्होंने कुछ दिन पहले पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था।

गुरुवार को कागजात वेरिफिकेशन की तारीख मिली थी। कार्यालय पहुंचा तो एक मैडम ने ओरिजनल कागज देखा तो कागज एक साल पुराने न होने की वजह से फार्म पर दूसरी पुरानी आईडी लाने का निर्देश दे दिया।

बाहर निकले तो गेट पर मौजूद एक युवक ने उनसे संपर्क साधा। युवक का आग्रह था कि 1000 रुपए खर्च करो। आपकी पुरानी आईडी बन जाएगी। अली हुसैन परेशान कि इसे कैसे पता चला।

युवक फोन निकलता है और पासपोर्ट ऑफिस के सामने मौजूद रहने वाले दलाल श्रीवास्तव जी के मोबाइल पर घंटी बजती है। युवक ने बात कराई।

फोन पर आवाज आई, हैलो कौन? भाई साहब अली हुसैन बोल रहा हूं। अरे भाई साहब पासपोर्ट बनवाने के लिए आया था। कागजात नए हैं इसलिए वापस कर दिया है।

उधर से जबाव मिला कि कोई बात नहीं यार ये सब तो इनका रोज का काम है। मुझसे कल मिलो सब ठीक हो जाएगा। अली हुसैन ने पूछा, साहब कितने पैसे लगेंगे? फोन पर जबाव मिला- देखो भाई काम कठिन है।

पुराना पैन कार्ड बनवाने के लिए कम से कम 1,000 रुपए लगेंगे। पुरानी पासबुक के लिए भी एक हजार रुपए में काम होगा। बस सुबह थोड़ा जल्दी आ जाना। हमारा तो काम ही खुश रखना है।

पैन कार्ड बनवाने में तो एक महीना लग जाएगा। पास में खड़ा एक लड़का बताता है नया पैन कार्ड बैक डेट में कैसे बन सकता है। पढ़े लिखे नहीं हो क्या।

पान मसाले की पीक थूकते हुए, अरे यार जो पैन कार्ड बना है उसी में पूरा खेल होगा और काम हो जाएगा। पैसा खर्च करो बाकी की टेंशन हमारे ऊपर छोड़ दो। तुम भी खुश और हमारा तो काम ही है दूसरों को खुश रखना।

170 रुपए में बनाई एनओसी
पासपोर्ट बनवाने आए अंबेडकरनगर के रुदऊपुर के अली हुसैन पढ़े लिखे नहीं है। पासपोर्ट बनवाना है ताकि विदेश जाकर कुछ काम-धामकर के पैसे कमा लिए जाएं। लेकिन पढ़े-लिखे नहीं हैं तो दसवीं की मार्कशीट कहां से आएगी।

इसलिए फॉर्म के साथ अशिक्षित होने का प्रमाण पत्र दस रुपए के स्टांप पेपर पर जमा करना था। कोई दिक्कत नहीं हुई पते का प्रमाण पत्र और आईडी प्रूफ के साथ 170 रुपए पासपोर्ट ऑफिस के बाहर बैठे वकील साहब को दे दिया।

अगले दिन कागज मिल गया। उनका कहना था कि कचहरी के चक्कर लगाने से अच्छा है कि थोड़े बहुत पैसे में सिरदर्दी कम हो जाती है।

विभाग: नगर निगम
समय: दोपहर 2:30 बजे
खर्चा जो होगा बता दिया जाएगा, पहले पेपर लाओ
जो हमने देखा- जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय में घुसते ही एक कर्मचारी से सामना हुआ। उन्होंने पूछा कैसे आना हुआ? बताया कि एक जन्म प्रमाण पत्र बनवाना है। कैसे बनेगा।

रिपोर्टर ने बताया कि बच्चा एक साल का हो चुका है। जन्म घर पर ही हुआ था। ऐसे में अस्पताल का सर्टिफिकेट नहीं है। उस कर्मचारी ने दूसरे कर्मचारी की तरफ इशारा कर आवाज लगाई।

भाई देखिए, यह तो आपका मामला है। दूसरे ने पूछा कि किसका बनना है? जबाव दिया कि मेरे भतीजे का है। कर्मचारी ने भरोसा दिलाया कि परेशान नहीं होइए बन जाएगा। कुछ एड्रेस प्रूफ की जरूरत पडे़गी।

कुछ खर्च होगा। वह आप देख लीजिएगा। कितना खर्च होगा? जबाव मिला कि ज्यादा खर्च नहीं है, बस आप पेपर ले आइए। फॉर्म मांगा तो कहा कि हम यहां बैठे तो हैं। सब काम हो जाएगा। जब आपको बनवाना हो तो बता दीजिएगा। इसकेसाथ ही उन्होंने बता दिया कि आपका काम जल्दी और आसानी से हो जाएगा।

बिना टेस्ट 3 हजार रुपए में ड्राइविंग लाइसेंस
समय : 01:20 बजे
जगह: क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, रहीमनगर चौराहा शाखा
जो हमने देखा- क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय लखनऊ की महानगर स्थित शाखा में सूचना पट्ट पर लिखा था कि लर्निंग लाइसेंस के लिए 50 रुपए और परमानेंट लाइसेंस स्मार्ट कार्ड के लिए 200 रुपए शुल्क लगेगा।

सिर्फ 2 पासपोर्ट साइज फोटो, जन्मतिथि का मूल प्रमाण पत्र (वेरिफिकेशन के बाद लौटाया जाता है), प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी, पते का प्रमाण पत्र और रजिस्ट्री लिफाफा देना होगा।

हकीकत कुछ अलग ही थी। कार्यालय के भीतर गिनती के लिए लोग थे, जबकि बाहर बनी पार्किंग में कई लोग हाथों में दस्तावेज लिए दलालों से बतियाते मिले। कई पुरुष अपने घर की महिलाओं के डीएल बनवाने लेकर आए थे और जगह जगह दलाल उन्हें घेरकर प्रक्रिया आसान बनवाने का लालच दे रहे थे।

पूछने पर मालूम हुआ कि ये ‘कायदे के लोग’ लाइसेंस बनवाते हैं। राज जायसवाल इन्हीं में शामिल हैं, बातचीत में बताया कि ‘भइया.. अंदर लर्निंग लाइसेंस भी बनवाने जाओगे तो ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने का खतरा है।’

इसे पास करवाने की जुगाड़ पूछने पर राज ने बताया कि वे 700 रुपए लर्निंग लाइसेंस के लिए लेंगे और बाकी 10-12 दिन बाद परमार्नेंट के लिए आना तब वो भी करवा देंगे।

टेस्ट में फेल होने के खतरे पर राज कहते हैं कि परमार्नेंट के लिए ड्राइविंग टेस्ट पास करने के लिए 2,000 रुपए लगेंगे और पास करवाने की पूरी गारंटी है। कुल 2,700 रुपए में काम हो जाएगा।

संवाददाता ने राशि ज्यादा होने की बात कही तो भाव-ताव होने लगा। एक अन्य दलाल ने दिलचस्पी लेनी शुरू की। अपना नाम युसूफ खान बताया और कहा कि 800 में लर्निंग और 2100 में परमार्नेंट लाइसेंस बनवा देगा।

100 रुपए मिठाई के दे देना। काम में कोई गलती नहीं होगी और इसके लिए सुबह 10 बजे तक जरूरी दस्तावेज लेकर कार्यालय पहुंचना होगा। इस दौरान ड्राइविंग टेस्ट वगैरह सब हो जाएंगे जाएगा, बस ‘भाभीजी’ को लेकर आना होगा।
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भ्रष्टाचार का गणित, प्रतिदिन
विभाग: नगर निगम
सुविधा: जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, प्रॉपर्टी टैक्स
आधिकारिक फीस: 20 रुपए, एक साल से ज्यादा पर 25 रुपए। 10 रुपए का फॉर्म अतिरिक्त।
रिश्वत की कमाई: 200-300 रुपए, 2000-5000 रुपए तक प्रॉपर्टी टैक्स
प्रमाणपत्र की संख्या: 150 प्रतिदिन, 50 मामले प्रॉपर्टी टैक्स में सुधार के।
कुल रिश्वत: 1.87 लाख रुपए

विभाग: तहसील
सुविधा: सामान्य निवास और आय प्रमाण पत्र
आधिकारिक फीस: 35 रुपए
रिश्वत की कमाई: 450 रुपए
प्रमाणपत्र की संख्या: 600-800
कुल रिश्वत: 3.60 लाख।

विभाग: लखनऊ विकास प्राधिकरण
सुविधा: मकान का नक्शा पास कराना
आधिकारिक फीस: 23,000 रुपए सामान्य भवन
रिश्वत की कमाई: 5,000 रुपए
नक्शों की संख्या: 20
कुल रिश्वत: 1 लाख रुपए

विभाग: जलसंस्थान
सुविधा: पानी का कनेक्शन
आधिकारिक फीस: 5,000 रुपए
रिश्वत की कमाई: 2,000 रुपए
कनेक्शन की संख्या प्रतिदिन: 50
कुल रिश्वत: 1 लाख

सुविधा: नए कनेक्शन दो किलोवाट
विभाग: बिजली
आधिकारिक फीस: 2650 रुपए
रिश्वत की कमाई: 5000-6500 रुपए
कनेक्शन की संख्या प्रतिदिन: 50
कुल रिश्वत: 2.70 लाख रुपए

विभाग: पासपोर्ट
सुविधा: नए पासपोर्ट जारी करना, नवीनीकरण
आधिकारिक फीस: 1,000 रुपए सामान्य, 2500 रुपए तत्काल।
रिश्वत की कमाई: 4,000-7000 रुपए
पासपोर्ट जारी, प्रतिदिन: 300
कुल रिश्वत: 16.5 लाख रुपए

विभाग: आरटीओ
सुविधा: ड्राइविंग लाइसेंस
आधिकारिक फीस: 60 रुपए लर्निंग, 250 रुपए स्थाई।
रिश्वत की कमाई: 300-750 रुपए
पासपोर्ट जारी, प्रतिदिन: 650
कुल रिश्वत: 3.25 लाख रुपए

(यह सभी आंकड़े औसत में विभागों में रोजाना होने वाले काम और दलालों और कर्मचारियों की मिली भगत से बनी रिश्वत की रेटलिस्ट पर जुटाए गए हैं। कमोबेश हर रोज केवल इन सुविधाओं की रिश्वत लाखों में है। अगर विभाग की दूसरी सुविधाओं को भी जोड़ लें तो यह आंकड़ा कई गुना हो जाता है।)
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