इसे यूपी से लेकर दिल्ली तक की सियासी पैतरेबाजी कहें या कुछ और, लगातार दूसरा साल है जब सूबे को पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) से मंजूर पूरी रकम नहीं मिल पा रही है।
35 में से महज 14 जिलों को पहली किस्त मिली है जबकि 21 जिलों को यह भी नसीब नहीं हुई है।
2013-14 में 600 करोड़ रुपये फंसता नजर आ रहा है। प्रदेश के 35 पिछड़े जिलों को केंद्र सरकार बीआरजीएफ के अंतर्गत विशेष मदद उपलब्ध कराती है।
वर्ष 2012-13 में प्रदेश के लिए 667 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी।
मगर मौजूदा सरकार ने पिछली बसपा सरकार के कार्यकाल में इन योजनाओं में बड़ी धांधली का हवाला देते हुए ईओडब्ल्यू जांच कराने की घोषणा कर दी थी।
साल भर बाद सरकार ने अपना यह फैसला वापस ले लिया। इस दांव-पेंच में सरकार पिछले सालों में खर्च रकम का उपभोग प्रमाणपत्र केंद्र को नहीं भेज पाई।
नतीजा ये हुआ कि करीब 500 करोड़ रुपये नहीं मिल सका। वर्ष 2013-14 में ईओडब्ल्यू जांच से हटाने का फैसला किया तो केंद्र ने पिछले साल से ज्यादा रकम को मंजूरी दी।
चालू साल के लिए 818 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। मगर हालात ये हैं कि अब तक मात्र 14 जिलों के लिए 215 करोड़ रुपये ही मिला है। वित्त वर्ष के नौ महीने बीत चुके हैं, बाकी 21 जिलों को एक पाई नहीं मिल पाया है।
प्रदेश सरकार के अफसरों का कहना है कि स्वीकृत रकम जारी करने के लिए जरूरी उपभोग प्रमाणपत्र भी केंद्र को उपलब्ध कराया जा चुका है।
गत 31 दिसंबर तक कम से कम 500 करोड़ रुपये और जारी हो जाने चाहिए थे। मगर हर मीटिंग में आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
स्वीकृत बजट में कटौती की आशंका
कई विभागों के अधिकारियों को केंद्र से स्वीकृत परियोजनाओं के बजट में कटौती की आशंका सताने लगी है।
ग्राम्य विकास विभाग को मनरेगा में करीब 1000 करोड़ रुपये अभी मिलना बाकी है। इसी तरह बीआरजीएफ के लिए भी सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
आशंका जताई जा रही है कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के बजट में कटौती कर केंद्र लोकसभा चुनाव के लिहाज से अहम एजेंडे खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए पैसा डायवर्ट करने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि केंद्र सरकार के अधिकारी पैसा जारी करने का आश्वासन दे रहे हैं।
इन जिलों को पहली किस्त भी नहीं मिली
अंबेडकरनगर, बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, जौनपुर, कौशांबी, कुशीनगर, ललितपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, उन्नाव व कासगंज।
यहां दूसरी किस्त नजर आ रही मुश्किल
आजमगढ़, बदायूं, मिर्जापुर, एटा, गोंडा, जालौन, महोबा, संतकबीरनगर, फतेहपुर, सोनभद्र, महराजगंज, चित्रकूट, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी।