ब्रेन डेड मरीज के अंगों से अन्य लोगों को जीवनदान देने की मुहिम में मंगलवार को एक और बड़ी सफलता मिली।
केजीएमयू और पीजीआई के डॉक्टरों ने एक्सीडेंट के कारण ब्रेन डेड अवधेश के गुर्दे और लिवर लेकर दो मरीजों की जान बचा ली। इस बार खास बात ये रही कि ब्रेन डेड मरीज के अंगों को ट्रॉमा सेंटर में निकाला गया।
यही नहीं पहली बार किसी कैडबर (मस्तिष्क मृत) से मिले दो अंगों को एक ही मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। सीतापुर के अवधेश (42) सोमवार को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
परिवारवाले उन्हें लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने बताया कि सिर में मल्टीपल इंजरी के कारण उसका ब्रेन डेड हो चुका है। चिकित्सकों ने जांच में पाया कि उसके गुर्दे और लिवर से अन्य मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
इसके बाद अवधेश के घरवालों से उसके अंगदान के लिए ट्रॉमा सेंटर की टीम ने संपर्क किया और बताया कि कैसे एक व्यक्ति मरने के बाद भी दूसरे मरीजों की जिंदगी बचा सकता है।
केजीएमयू प्रशासन की ये मेहनत रंग लाई और अवधेश के घरवालों ने केजीएमयू के डॉक्टरों को उनके अंग लेने की अनुमति दे दी। अवधेश का एक गुर्दा और लिवर ऐसे मरीज को लगाया गया जिसकी स्थिति काफी गंभीर थी।
केजीएमयू में आए इस मरीज को चिकित्सकों ने गुर्दा और लिवर प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी थी। ब्रेन डेथ अवधेश के अंग मिलने के बाद तुरंत उस मरीज को बुलाकर प्रत्यारोपण की तैयारियां शुरू कर दी गई।
इसके अलावा दूसरी किडनी के लिए अन्य मरीज को पीजीआई बुला लिया गया। सभी कानूनी कार्रवाई पूरी कर ट्रॉमा सेंटर में ही ब्रेन डेड अवधेश के अंगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
अवधेश के अंगों को निकालकर केजीएमयू से पीजीआई ले जाया गया। वहां 15 घंटे तक चले ऑपरेशन में दोनों मरीजोें का प्रत्यारोपण किया गया। खास बात ये रही कि रात तीन बजे अवधेश के अंगों को लेकर केजीएमयू की टीम पीजीआई पहुंची। इसके बाद प्रत्यारोपण शुरू हुआ।