सीमा विस्तार वाले नगर निकायों में नए सिरे से वार्ड आरक्षण तय किया जाएगा। यानी आरक्षण के लिए पहले से चले आ रहे चक्रानुक्रम (रोटेशन) को शून्य मानकर नये सिरे आरक्षण किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक जिन निकायों का सीमा विस्तार नहीं किया गया है, वहां आरक्षण पुराने रोटेशन से होगा। हालांकि सभी शहरी निकायों से रैपिड सर्वे (ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए इनकी अनुमानित संख्या का आकलन) का आंकड़ा फाइनल होने के बाद ही आदेश जारी किए जाएंगे। पिछली बार की तुलना में इस बार 111 अधिक निकायों में चुनाव कराए जाएंगे। सीमा विस्तार से कई वार्ड की चौहद्दी भी बदल गई है।
बता दें कि नगरीय निकायों में मेयर और अध्यक्ष की सीटों के अलावा वार्डों का आरक्षण रोटेशन के आधार पर तय होता है। यानी, सामान्य स्थितियां होने और आबादी मुफीद होने पर पहले सीटों का आरक्षण एससी महिला- एससी, ओबीसी महिला-ओबीसी और फिर सामान्य के लिए तय होता है। इसमें वॉर्डों की आबादी में एससी और ओबीसी की संख्या भी अहम होती है।
एक बार आरक्षण तय होने के बाद अगली बार आरक्षण का क्रम एक चरण आगे बढ़ जाता है। यानी महिलाओं के लिए आरक्षित सीट को जाति विशेष की सामान्य सीट या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया जा सकता है। यही प्रक्रिया नगरीय निकायों में चेयरमैन या मेयर की सीट का आरक्षण तय करने के लिए भी अपनाई जाती है। जिन निकायों में नये सिरे से आरक्षण होगा वहां तमाम चेहरे बदल जाएंगे। जो चेहरे सामान्य सीटों पर काबिज हैं, उनमें से कई जातिगत तौर पर आरक्षित हो सकते हैं।