लखनऊ। कथक की भाव-भंगिमाओं से लेकर अभिनय के नवरस तक, भारतेंदु नाट्य अकादमी के विद्यार्थियों ने छह दिवसीय कार्यशाला में भारतीय शास्त्रीय कलाओं की बारीकियां सीखीं। बीएनए और उप्र संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ।
कार्यशाला में देविका देवेंद्र एस. मंगलामुखी ने विद्यार्थियों को कथक की पारंपरिक शैली, अभिनय के विविध आयामों और भारतीय शास्त्रीय कलाओं की विरासत से परिचित कराया। उन्होंने कथक सम्राट आचार्य लच्छू महाराज की परंपरा और कपिला राज शर्मा के मार्गदर्शन से जुड़ी कलात्मक विशेषताओं की जानकारी दी।
विद्यार्थियों ने नाट्यशास्त्र, अभिनय दर्पण, संयुक्त हस्तमुद्राओं, नवरस, ग्रीवा भेद और गुरु वंदना का अभ्यास किया। उन्हें आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्त्विक अभिनय के व्यावहारिक पक्ष भी समझाए गए। साथ ही अभिनय में कॅरिअर की संभावनाओं के साथ नियमित अभ्यास, अनुशासन और समर्पण का महत्व बताया गया।