भले ही भाजपा नेता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हवा से लोकसभा चुनाव में यूपी से 40 से ज्यादा सीटें हासिल कर लेने का भरोसा पाले हों, पर मोदी की टीम सिर्फ इस हवा के सहारे नहीं रहना चाहती।
इसकी बानगी मंगलवार को दिल्ली बैठक में यूपी के नेताओं को मिल भी गई। मोदी के करीबी सहयोगी व प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने साफ कर दिया कि जमीन पर काम चाहिए।
मोदी की पहली रैली काफी जोरदार होनी चाहिए। किसी रैली में एक लाख लोगों से कम की भीड़ को सफल आयोजन नहीं माना जाएगा।
रैलियों के मंच को सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस रखने का भी फैसला हुआ जिससे भाजपा को लेकर लोगों के बीच सामाजिक समरसता का संदेश जाए।
दरअसल, संघ परिवार यूपी में मोदी की धमाकेदार एंट्री कराना चाहता है। उसे पता है कि मोदी के पहले ही कार्यक्रम में अगर भीड़ न जुटी तो गलत संदेश जाएगा। साथ ही इससे जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई भी आसान नहीं होगी।
इसीलिए वह मोदी की रैलियों को लेकर न सिर्फ सचेत है बल्कि भाजपा के बड़े नेताओं व रणनीतिकारों को भी इस सिलसिले में जरा भी चूक की गुंजाइश न छोड़ने की हिदायत दी है।
यही वजह है कि मोदी की रैलियों को भीड़ के लिहाज से सफल बनाने के लिए नेताओं के लिए लक्ष्य तय करने का फॉर्मूला बना है।
इस पूरे काम की मॉनिटरिंग खुद अमित शाह करेंगे। इसके लिए वह अक्तूबर के पहले पखवारे में लगभग एक सप्ताह प्रदेश में डेरा डालने वाले हैं। इस दौरान वह क्षेत्रों में जाकर रैली की तैयारियों की मॉनिटरिंग करेंगे।
गांधी जयंती से शुरू होंगे शाह के दौरे
जानकारी के मुताबिक शाह का यूपी दौरा गांधी जयंती यानी 2 अक्तूबर से शुरू होगा। शुरुआत वह जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान से करेंगे।
इसके बाद 3 अक्तूबर को वह कानपुर जाएंगे। कानपुर के बाद वह लखनऊ, बरेली वाराणसी व इलाहाबाद जाकर कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे। बैठकों का सिलसिला 2 से 9 अक्तूबर तक चलेगा।
बातचीत के लिए शाह ने जिन लोगों को बुलाने का फैसला किया है, उनमें मौजूदा क्षेत्रीय पदाधिकारियों के अलावा पूर्व पदाधिकारी, जिलों के मौजूदा व पूर्व पदाधिकारी, पार्टी के वर्तमान व पूर्व सांसद, विधायक और अन्य महत्वपूर्ण लोग शामिल हैं।
साफ है कि शाह की रणनीति में भाजपा के सभी लोगों को एक साथ जुटाने का फॉर्मूला शामिल है।
सामाजिक समरसता
तय हुआ है कि रैलियां जिस इलाके में हों, वहां के सामाजिक समीकरणों के मद्देनजर लोगों को मंच पर जगह दी जाए।
अगर कोई भाजपा में नहीं है लेकिन सामाजिक क्षेत्र में ठीक काम कर रहा है, उसकी किसी समाज में खास पकड़ व पहचान है तो उसे भी रैली के मंच पर लाने का प्रयास किया जाए।
बैनर व पोस्टरों पर भी क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों के लिहाज से पकड़ रखने वाले लोगों को शामिल किया जाए।
यही नहीं, मोदी के भाषण में स्थानीय समस्याओं का समावेश कराने के लिए स्थानीय नेताओं को अपने इलाके की प्रमुख समस्याओं का ब्यौरा जुटाने की जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि भाजपा की रैलियां देश व प्रदेश में परिवर्तन की सूत्रधार बनेंगी। रैली में ऐतिहासिक भीड़ जुटेगी।