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न बरतें लापरवाही, ये कैंसर का लक्षण भी हो सकता है...

Sat, 27 Dec 2014 05:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पेशाब के साथ खून आना गुर्दे या मूत्राशय की बीमारी के सबसे खतरनाक लक्षण हैं। यदि किसी भी पुरुष या महिला को कभी पेशाब में खून आया हो तो इसे गंभीरता से लेते हुए यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
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ये कैंसर के कारण भी हो सकता है। इसलिए इसकी सही जांच होना बहुत जरूरी है। संजय गांधी पीजीआई में शुक्रवार से शुरू तीन दिवसीय यूरो मीट में यह जानकारी प्रो. अनिल मंधानी ने दी।

श्रुति ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में संजय गांधी पीजीआई के प्रो. अनिल मंधानी ने बताया कि यूरी मीट में गुर्दे में कैंसर की सर्जरी के बारे में लाइव जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि पेशाब में खून आना कभी-कभी अपने आप बंद हो जाता है।
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या फिर किसी फिजीशियन से इलाज के बाद उसे परेशानी से निजात मिल जाती है। इसलिए इसे लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन ये गुर्दे या फिर यूरीनरी ब्लैडर (मूत्राशय) के कैंसर के भी लक्षण हो सकते हैं।

लापरवाही से बढ़ सकता है कैंसर

मरीज की लापरवाही में कैंसर को बढ़ने का मौका मिल जाता है जो बढ़कर जानलेवा हो जाता है। प्रो. मंधानी ने बताया कि गुर्दे में यदि चार सेंटीमीटर तक का ट्यूमर है तो सर्जरी कर आधी किडनी को बचाया जा सकता है।

ये सर्जरी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से संभव है। इससे अधिकतम तीन दिन में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। प्रो. मंधानी ने बताया कि यूरोलॉजी सर्जरी में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है।

इससे मरीज को कम से कम दर्द होता है और उसके अस्पताल में रुकने का समय भी कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण के केस में लैप्रोस्कोपी से ही दाता का गुर्दा निकाला जाता है।
 
इसमें लैप्रोस्कोप से गुर्दे को अलग किया जाता है। इसके बाद नाभि के नीचे छह सेंटीमीटर का कट लगाकर गुर्दे को बाहर निकाला जाता है। जबकि ओपेन सर्जरी में कम से कम 25 सेंटीमीटर का कट कमर के ऊपर लगाया जाता है।
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थ्री डी लैप्रोस्कोपी से इलाज होगा आसान

लैप्रोस्कोप से गुर्दा निकालने से मरीज को दर्द कम होता है। क्योंकि इसमें मांसपेशियों को कम काटना पड़ता है। साथ ही रक्त भी ज्यादा नहीं निकलता।

यूरोलॉजी में थ्री डी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का युग
प्रो. अनिल मंधानी ने बताया कि अभी तक टू डी लेप्रोस्कोप से सर्जरी की जाती थी। अब थ्री डी लैप्रोस्कोप का युग आ गया है।

इससे थ्री डायमेंशनल (तीन आयामी) पिक्चर दिखती है। जिससे लंबाई, चौड़ाई और गहरायी का सटीक अंदाजा लग जाता है। थ्री डी लैप्रोस्कोप के इस्तेमाल से सर्जरी की सटीकता बढ़ती है और सफलता की दर बढ़ जाती है।

यूरो मीट में एक ही स्क्रीन पर टू डी और थ्री डी लैप्रोस्कोप से सर्जरी का प्रदर्शन किया गया। जिससे चिकित्सक इसके अंतर को समझ सकें।
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