राजधानी के सरकारी अस्पताल सिविल,बलरामपुर और लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में 24 घंटे रक्त मिलना मुश्किल हो रहा है। इन तीनों अस्पतालों के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त इन्हीं के ब्लड बैंक से मिलना है लेकिन स्थिति ये है कि दोपहर बाद या देर रात ब्लड की जरूरत पड़ जाए तो केजीएमयू ही जाना पड़ेगा।
स्टाफ का संकट और ब्लड की डिमांड के आगे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है और अब हालात ऐसे हैं कि दोपहर दो बजे के बाद शहर के इन तीनों ब्लड बैंक को ऑनकॉल डॉक्टरों के भरोसे चलाया जा रहा है।
बलरामुपर अस्पताल में कुल दो पैथोलॉजिस्ट हैं जिनके पास पैथोलॉजी के साथ ब्लड बैंक की भी जिम्मेदारी है। रोजाना एक डॉक्टर ब्लड बैंक और एक डॉक्टर पैथोलॉजी में ड्यूटी करते हैं और दोपहर दो बजे के बाद ब्लड बैंक टेक्नीशियन के हवाले हो जाता है जिसके भरोसे ब्लड मिलना मुश्किल है।
इसी तरह लोहिया अस्पताल में कुल नौ पैथोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत हैं और तैनाती सिर्फ पांच की है। सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक भी अव्यवस्था में पीछे नहीं है।
कुल पांच पैथोलॉजिस्ट हैं जिनके पास पैथोलॉजी से लेकर ब्लड बैंक का काम है। डॉक्टरों के संकट का ही नतीजा है कि इमरजेंसी सर्विस माने जाने वाले ब्लड बैंक की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और मरीजों के तीमारदार रक्त के लिए भटकने को मजबूर हैं।