एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया। आसान शब्दों में कहें तो एक प्रकार का ब्लड कैंसर। जो बेहद तेज और घातक होता है। पर यह कोई मौत का सर्टिफिकेट नहीं। इसे जीता जा सकता है। मरीज फिर से स्वस्थ जिंदगी जी सकता है। बशर्ते इलाज की रणनीति सही हो। यह कहना है संजय गांधी पीजीआई में आयोजित हीमेटो आंकोलॉजी प्रैक्टिस एक्सीलेंस सिम्पोजियम (होप) में जुटे विशेषज्ञों का।
क्या है एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया
यह खून एवं बोन मैरो यानी अस्थिमज्जा का एक प्रकार का कैंसर है। दरअसल हमारी हड्डियों के अंदर पाई जाने वाली मज्जा ब्लड स्टेम सेल (अपरिपक्व कोशिकाएं) पैदा करता है।
यह कोशिकाएं विकास की प्रक्रिया में आगे बढ़ परिपक्व होती हैं। इन्हीं से सफेद रक्त कणिका जो कि संक्रमण से लड़ती हैं, लाल रक्त कणिका जो कि पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं और प्लेटलेट्स जो कि चोट लगने पर थक्का बनाकर खून को बहने से रोकती हैं, तैयार होती हैं।
पर एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया में ऐसा विकार पैदा हो जाता है कि सफेद रक्त कणिकाएं परिपक्व होती ही नहीं। वहीं कई लाल रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स में भी खराबी आने लगती है। अगर समय पर सही इलाज न हो तो यह कैंसर बड़ी तेजी से बेहद खराब दशा में पहुंच जाता है।