दशकों पुरानी हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक बीकेटी की ऐतिहासिक रामलीला महंगाई के चलते चार दिन की बजाय अब तीन दिन की होगी।
रावण का कद भी गत वर्षों की अपेक्षा छोटा होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कटौती के साथ ही शिव बारात में ऊंट, घोड़े और हाथियों की संख्या भी कम रहेगी। यह निर्णय रविवार को रामलीला प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया।
समिति सदस्य ने बताया कि पहले रामलीला का आयोजन चार दिनों का होता था, लेकिन इस बार महंगाई के चलते इसका आयोजन केवल तीन दिन 14,15 व 16 अक्टूबर को किया जाएगा।
10 फीट घटी लंबाई
पहले रावण का कद 40 फीट होता था, लेकिन इस बार ये घटकर मात्र 30 फीट रहेगा। नगर पंचायत व मेला कमेटी के संयुक्त प्रयासों से आयोजित रामलीला के रात्रि को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी कटौती की गई है।
इस बार दो दिन नौटंकी व एक दिन ऑर्केस्ट्रा का कार्यक्रम होगा। साथ ही शिव बारात में भी दो दर्जन ऊंट, चार हाथी व दर्जनों वाहन की अपेक्षा सीमित साधनों का उपयोग किया जाएगा।
समिति सदस्य गनेश रावत ने बताया कि रामलीला पर हर साल लाखों रुपये का खर्च आता है। इस खर्चे को चंदे से पूरा किया जाता था, लेकिन अब वह भी बंद हो गई है।
उन्होंने कहा कि महंगाई के चलते रामलीला आयोजन के खर्च में कटौती की गई है, लेकिन एतिहासिक रामलीला की भव्यता को कायम रखने का प्रयास किया जाएगा।
हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक बख्शी का तालाब की ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत 1972 में गांव रुदही के प्रधान मैकूलाल यादव व बीकेटी के प्रमुख समाजसेवी डॉ. मुजफ्फर अली ने की थी।
इस परंपरा को मैकूलाल के पुत्र विदेश पाल यादव व डॉ. मुजफ्फर के पुत्र मंसूर अहमद व शहजाद अहमद ने आगे ले गए। रामलीला की खासियत यह है कि इससे जुड़े पात्र हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिम वर्ग से है।
रामलीला से जुड़े साबिर खान के बेटे सलमान व अरबाज राम व लक्ष्मण की भूमिका निभाते है। खुद साबिर दशरथ का रोल करते है। जबकि रावण नसीम खान बनते हैं।
इसके अलावा रामलीला से जुड़े कई पात्रों का रोल भी मुस्लिम युवकों द्वारा निभाया जाता है। वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई इस रामलीला को ‘लासा कौल’ राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं।