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जानें! क्यों राजनाथ करते हैं अटल के नाम का गुणगान

Mon, 28 Apr 2014 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ से चुनाव लड़ रहे राजनाथ सिंह बार बार चुनावी सभा में अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का जिक्र कर रहे हैं, ऐसा कर वह अपने मकसद में कामयाब भी हो रहे हैं।
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राजधानी का चुनाव निर्णायक मुकाम पर आ पहुंचा है। चर्चा राजनाथ सिंह की कम अटल और मोदी की ज्यादा है।

सियासी तस्वीर साफ तौर पर यह बता रही है कि चुनाव भले ही राजनाथ सिंह लड़ रहे हों लेकिन वोट अटल बिहारी वाजपेयी और नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही पड़ेंगे।

लोग राजनाथ सिंह को लेकर असमंजस में हैं लेकिन अटल व मोदी के नाम पर उनका साथ दे सकते हैं।

राजनाथ का पक्ष मजबू‌त

अटल की विरासत पर किसी दूसरे का कब्जा न होने देने के समीकरण भी राजनाथ के पक्ष को मजबूत बना रहा है।

राजनाथ सिंह भी इस बात को जानते है। तभी तो प्रत्याशी बनने के बाद पहले ही दिन से वह अटल का गुणगान कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की कार्यक्षमता का बखान कर रहे हैं।

वह लोगों को आश्वस्त कर रहे हैं कि चुनाव जीतने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के कामों को आगे बढ़ाएंगे। लखनऊ को अटल जी के सपने के मुताबिक बनाने की कोशिश करेंगे।

वह बताते हैं कि मोदी में भी अटल जैसी ही कार्यक्षमता है। कुल मिलाकर कहीं से भी वह इन दोनों लोगों से हटकर अपने बारे में कोई संदेश नहीं जाने देना चाहते।

विकल्पों की कमी

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि लखनऊ के समीकरणों के मद्देनजर राजनाथ सिंह के सामने इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है।

वह जानते हैं कि लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम ही उनकी नैया पार लगा सकता है। राजधानी का 3.50 लाख ब्राह्मण मतदाता उनके साथ जुड़ा रह सकता है।

दूसरे दलों के ब्राह्मण उम्मीदवारों को ब्राह्मणों की बीच सेंधमारी से रोक सकता है। इसलिए वह लगातार अटल के नाम का जाप कर रहे हैं। रही मोदी के गुणगान की तो राजनाथ यह भी जान चुके हैं कि मोदी को लेकर देश का मूड बदला हुआ है।

लड़ कोई भी रहा हो लेकिन वोटों का बंटवारा मोदी के ही मुद्दे पर हो रहा है। इसीलिए वह मोदी-मोदी कर रहे हैं।

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मिल चुकी है हार

वैसे मोदी के कामकाज के बखान के पीछे एक वजह अतीत का अनुभव भी है। राजनाथ को 1993 याद आ जाता होगा।

जब भावी मुख्यमंत्री की चर्चा ने उन्हें किस तरह पटकनी दी थी। सपा के उस समय अन्जान से उम्मीदवार के हाथों ने उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

इसीलिए वह प्रधानमंत्री की चर्चा शुरू होते ही सावधान हो जाते हैं। कहते हैं कि मोदी ही प्रधानमंत्री होंगे। ऐसा लगता है कि वह जान चुके हैं कि अटल व मोदी का आसरा छिना तो उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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