बुंदेलखंड की पथरीली जमीन खेती-किसानी के लिहाज से भले ही लोगों में बहुत उम्मीद न जगाती हो लेकिन भाजपा ने यहां से काफी उम्मीदें लगा रखी हैं।
इन उम्मीदों का आधार है अतीत की स्थितियां। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा के हिस्से में तीन सीटें आई थीं।
भाजपा की कोशिश है कि इन नतीजों और पार्टी के पक्ष में बने माहौल की नींव पर लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड में पार्टी का मजबूत किला खड़ा कर दिया जाए।
इसके लिए टीम मोदी के प्रमुख सलाहकार व प्रदेश प्रभारी अमित शाह की देखरेख में वहां कमल खिलाने के लिए खाद-पानी जुटाने की कोशिश की जा रही है। अपने सह प्रदेश प्रभारी सत्येंद्र कुशवाहा के साथ शाह दो दिन के लिए बुंदेलखंड में हैं।
आम तौर पर पानी और फसल के लिहाज से पिछड़ा माने जाने वाला यह इलाका भाजपा की चुनावी गणित व सामाजिक समीकरणों के लिहाज से काफी अनुकूल रहा है। यह बात दीगर है कि अलग-अलग कारणों से पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में कमल पूरी तरह कुम्हला गया।
पर, बुंदेलखंड में झांसी व ललितपुर के कुछ हिस्सों को छोड़ दें, तो ज्यादातर स्थानों पर भाजपा के चुनावी समीकरणों को मजबूत बनाने वाली राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियां स्वत: मौजूद हैं।
भले ही यहां आने वाली लोकसभा की चार सीटों में इस समय भाजपा के कब्जे में एक भी न हो, लेकिन अतीत में इन सभी सीटों पर भाजपा का कभी न कभी कब्जा रह चुका है। यही नहीं, विधानसभा के पिछले वर्ष हुए चुनाव में आए नतीजों ने भी भाजपा का उत्साह बढ़ाया है।
यहां की तीन सीटें भाजपा के खाते में लौट आई हैं। इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि कोशिश करके इस जमीन को कमल के लिहाज से बेहतर बनाया जा सकता है।