प्रदेश प्रभारी और फिर पांच सह प्रभारी बनाने के बाद भाजपा के रणनीतिकार अब क्षेत्रों में प्रभारियों की नियुक्ति की तैयारी में हैं। क्षेत्र प्रभारी प्रदेश के नेताओं में से ही बनाए जाएंगे या इन्हें भी बाहर से भेजा जाएगा, इस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है।
पर, ज्यादा संभावना यही है कि लोकसभा चुनाव की तरह क्षेत्र प्रभारियों के रूप में विद्यार्थी परिषद या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े किसी अन्य संगठन के किसी पूर्णकालिक कार्यकर्ता को ही जिम्मेदारी सौंपी जाए।
जानकारी के मुताबिक, भाजपा के रणनीतिकार लोकसभा चुनाव के प्रयोगों को ही कुछ फेरबदल के साथ दोहराकर उत्तर प्रदेश में मिशन 2017 में सफलता पाना चाह रहे हैं। जिस तरह ओम माथुर को प्रदेश प्रभारी बनाने के बाद दूसरे राज्यों के पांच लोगों को सह प्रभारी बनाकर उत्तर प्रदेश भेजा गया, उससे यह बात प्रमाणित हो जाती है।
संभवत: रणनीतिकारों को अब भी यह भरोसा नहीं है कि सूबे वालों के ऊपर ही पूरी जिम्मेदारी डालकर निश्चिंत हुआ जा सकता है।