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यूपी उपचुनाव: भाजपा के लिए बड़ी चुनौती, नए सांसदों को सौंपी जिताने की जिम्मेदारी

Sun, 02 Jun 2019 05:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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लोकसभा चुनाव में मिली भारी जीत का भाजपाइयों का उत्साह अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पार्टी नेताओं ने इस जीत को सहेजने और सुरक्षित रखने के साथ विधानसभा उपचुनाव की दूसरी परीक्षा में भी अव्वल आने की तैयारी शुरू कर दी। इसके लिए पार्टी नेता उपचुनाव वाली विधानसभा सीटों की पुख्ता व्यूहरचना में जुट गए हैं। पार्टी ने उपचुनाव वाली सीटों की जिम्मेदारी विधायक से सांसद बने नेताओं पर ही डालने का फैसला किया है।

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इन सबको इसके संकेत दे दिए गए हैं। दरअसल, प्रदेश के 12 विधायक इस बार लोकसभा का चुनाव लड़े। इनमें भाजपा के नौ विधायक, उसके सहयोगी अपना दल के एक तथा सपा और बसपा के एक-एक विधायक शामिल हैं। इनमें भाजपा के एक विधायक मुकुट बिहारी वर्मा को छोड़कर शेष सभी सांसद चुन लिए गए हैं।

इसकी वजह से इनकी सीटों पर उपचुनाव होना है। भाजपा के ज्यादातर विधायक सांसद चुने गए हैं। इसलिए उन पर उपचुनावों को जीतने का दबाव भी सबसे ज्यादा है। विपक्ष से सांसद बने आजम खां और रितेश पांडेय की सीटें भी अपनी झोली में डालकर यह साबित करने की चुनौती है कि भाजपा की जीत तुक्का नहीं है।

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यह है वजह

भाजपा के लिए उपचुनाव के नतीजों का अनुभव बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। भाजपा ने वर्ष 2014 में भी 11 विधायकों को लोकसभा का चुनाव लड़ाया था। ये सांसद बन गए, पर उपचुनाव में भाजपा सिर्फ तीन नोएडा, सहारनपुर और लखनऊ पूरब विधानसभा सीटें ही जीत पाई थी।

इस बार सांसद चुने गए भाजपा के कई विधायकों की विधानसभा सीट पर वोट 2017 के मुकाबले ज्यादा मिले हैं, फिर भी कुछ स्थानों पर भाजपा उम्मीदवार का वोट गठबंधन प्रत्याशी के मुकाबले कम पड़ गया। लिहाजा 2017 से ज्यादा वोट मिलने के बावजूद भाजपा गठबंधन उम्मीदवार से पीछे रह गई। इसीलिए भाजपा के रणनीतिकार इस बार कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते।

इसके लिए विधायक से सांसद बने नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने यहां देखें कि वोटों का आंकड़ा 60 प्रतिशत के ऊपर कैसे पहुंचाया जा सकता है, जिससे उपचुनाव में वोट के गणित से भाजपा को मात न मिले।

सांसदों को सौंपा काम

जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों हुई पार्टी नेताओं की बैठक में उपचुनाव वाली सीटों को लेकर लंबा विचार-विमर्श हुआ। निकट भविष्य में इन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को देखते हुए यहां से सांसद चुने गए नेताओं को इन स्थानों के लोगों से लगातार संपर्क व संवाद की ताकीद की गई।

कहा गया कि कुछ लोगों को इस बार अपनी विधानसभा सीट से बाहर जाकर लोकसभा का चुनाव लड़ाए गए हैं। उन्हें भी अपने मौजूदा विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहना है।

भले ही वे सांसद बन गए हों, लेकिन विधानसभा उपचुनाव में इन सीटों पर भाजपा को मिले मत ही उनकी लोकप्रियता की कसौटी होंगे। उसी आधार पर इन सांसदों का मूल्यांकन किया जाएगा।
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इन विधानसभा सीटों पर होने हैं उपचुनाव

सीट                       विधायक             कहां से सांसद
गोविंदनगर (कानपुर) --सत्यदेव पचौरी--कानपुर
टूंडला (फिरोजाबाद)--डॉ. एसपी सिंह बघेल--आगरा
कैंट (लखनऊ)--डॉ. रीता बहुगुणा जोशी--इलाहाबाद

जैदपुर (बाराबंकी)-- उपेंद्र रावत--बाराबंकी
मानिकपुर (चित्रकूट)--आरके पटेल--बांदा
बलहा (बहराइच)--अक्षयवर लाल गौंड--बलहा

गंगोह (सहारनपुर)--प्रदीप चौधरी--कैराना
इगलास (अलीगढ़)--राजवीर वाल्मीकि--हाथरस
प्रतापगढ़--संगमलाल गुप्त--प्रतापगढ़

रामपुर--आजम खां--रामपुर
जलालपुर (अंबेडकरनगर)--रितेश पांडेय--अंबेडकरनगर
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