भाजपा के लिए उपचुनाव के नतीजों का अनुभव बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। भाजपा ने वर्ष 2014 में भी 11 विधायकों को लोकसभा का चुनाव लड़ाया था। ये सांसद बन गए, पर उपचुनाव में भाजपा सिर्फ तीन नोएडा, सहारनपुर और लखनऊ पूरब विधानसभा सीटें ही जीत पाई थी।
इस बार सांसद चुने गए भाजपा के कई विधायकों की विधानसभा सीट पर वोट 2017 के मुकाबले ज्यादा मिले हैं, फिर भी कुछ स्थानों पर भाजपा उम्मीदवार का वोट गठबंधन प्रत्याशी के मुकाबले कम पड़ गया। लिहाजा 2017 से ज्यादा वोट मिलने के बावजूद भाजपा गठबंधन उम्मीदवार से पीछे रह गई। इसीलिए भाजपा के रणनीतिकार इस बार कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते।
इसके लिए विधायक से सांसद बने नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने यहां देखें कि वोटों का आंकड़ा 60 प्रतिशत के ऊपर कैसे पहुंचाया जा सकता है, जिससे उपचुनाव में वोट के गणित से भाजपा को मात न मिले।
जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों हुई पार्टी नेताओं की बैठक में उपचुनाव वाली सीटों को लेकर लंबा विचार-विमर्श हुआ। निकट भविष्य में इन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को देखते हुए यहां से सांसद चुने गए नेताओं को इन स्थानों के लोगों से लगातार संपर्क व संवाद की ताकीद की गई।
कहा गया कि कुछ लोगों को इस बार अपनी विधानसभा सीट से बाहर जाकर लोकसभा का चुनाव लड़ाए गए हैं। उन्हें भी अपने मौजूदा विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहना है।
भले ही वे सांसद बन गए हों, लेकिन विधानसभा उपचुनाव में इन सीटों पर भाजपा को मिले मत ही उनकी लोकप्रियता की कसौटी होंगे। उसी आधार पर इन सांसदों का मूल्यांकन किया जाएगा।
सीट विधायक कहां से सांसद
गोविंदनगर (कानपुर) --सत्यदेव पचौरी--कानपुर
टूंडला (फिरोजाबाद)--डॉ. एसपी सिंह बघेल--आगरा
कैंट (लखनऊ)--डॉ. रीता बहुगुणा जोशी--इलाहाबाद
जैदपुर (बाराबंकी)-- उपेंद्र रावत--बाराबंकी
मानिकपुर (चित्रकूट)--आरके पटेल--बांदा
बलहा (बहराइच)--अक्षयवर लाल गौंड--बलहा
गंगोह (सहारनपुर)--प्रदीप चौधरी--कैराना
इगलास (अलीगढ़)--राजवीर वाल्मीकि--हाथरस
प्रतापगढ़--संगमलाल गुप्त--प्रतापगढ़
रामपुर--आजम खां--रामपुर
जलालपुर (अंबेडकरनगर)--रितेश पांडेय--अंबेडकरनगर