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केंद्र में तो मोदी, पर प्रदेश में कौन?

Fri, 30 May 2014 01:23 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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केंद्र में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने में कामयाब हो गई है लेकिन प्रदेश में पार्टी एक सही विकल्प की तलाश में माथापच्ची कर रही है।
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विधानमंडल सत्र की तारीख घोषित होते ही भाजपा में विधानमंडल दल का नेता बनने की दौड़भाग तेज हो गई है।

कोई इस पद को पाने के लिए बड़े नेताओं से पैरवी कर रहा है तो कोई विधायकों की लामंबदी में जुटा है। विधानमंडल सत्र 19 जून से प्रस्तावित है।

इससे पहले भाजपा को दोनों सदनों में नेता का फैसला करना है। इस सिलसिले में अगले सप्ताह बैठक बुलाए जाने की संभावना है।

जीतने के बाद खाली हुआ पद

दरअसल, विधानसभा व विधान परिषद में भाजपा विधायक दल के नेता क्रमश: हुकुम सिंह और डॉ. नैपाल सिंह सांसद चुन लिए गए हैं।

दोनों ने यहां के सदन की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। भाजपा को दोनों सदनों के लिए विधानमंडल सत्र शुरू होने से पहले नेताओं का चयन करना होगा।

साथ ही विधानमंडल दल का पुनर्गठन करना होगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि अभी नाम नहीं तय हुए हैं लेकिन दोनों सदनों में ऐसे लोगों को यह भूमिका दी जाएगी जो आक्रामक रहें और जनहित के मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करें।

ये हैं दौड़ में

जो लोग नेता बनने की दौड़ में हैं, उनमें पूर्व मंत्री धर्मपाल सिंह, विधानसभा में पार्टी के उपनेता सतीश महाना, शाहजहांपुर से विधायक सुरेश खन्ना, बरेली से विधायक व पार्टी के कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, पार्टी के मुख्य सचेतक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल शामिल हैं।

कानपुर से विधायक महाना वरिष्ठ होने के साथ इस समय विधानमंडल दल के उपनेता हैं। इस नाते उनका दावा बनता भी है।

सुरेश खन्ना भी काफी वरिष्ठ विधायक हैं और लगातार जीत रहे हैं। पर, पार्टी का एक वर्ग इस पर पद किसी पिछड़े को बैठाना चाहता है।

पार्टी के एक राष्ट्रीय नेता इस पद पर धर्मपाल सिंह को बैठाना चाहते हैं। धर्मपाल पहले मंत्री रह चुकेहैं और पिछड़ी जाति के हैं।
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चाहिए आक्रामक तेवर

पार्टी के एक प्रदेश पदाधिकारी का कहना है कि भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में रहने का फैसला किया है। उस कसौटी पर पार्टी के कोषाध्यक्ष व विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके राजेश अग्रवाल व गोरखपुर से विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल भी मजबूत दावेदार दिखते हैं।

हालांकि लोकसभा चुनाव में प्रबंधन के क्षेत्र में राजेश अग्रवाल की भूमिका से संतुष्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करना चाहता।

इस तरह अब महाना, खन्ना, अग्रवाल और धर्मपाल में से ही किसी को विधानसभा में नेता का पद मिलने की संभावना है। वहीं, विधानपरिषद में हृदयनारायण दीक्षित व डॉ. यज्ञदत्त शर्मा के नामों की चर्चा है।

दौड़भाग में केदारनाथ सिंह भी लगे हैं। हालांकि भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व चाहता है कि यह जिम्मेदारी किसी ऐसे नेता को दी जाए जो सरकार के खिलाफ आक्रामक हो। इस कसौटी पर दीक्षित भारी पड़ते हैं।
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