राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की 25 अक्तूबर से कोच्चि (केरल) में शुरू हो रही चार दिनी बैठक में यूपी के मुद्दे व चिंताएं भी छायी रहेंगी।
खासतौर से यूपी में भाजपा नेताओं के निर्णयों व नीतियों को लेकर चिंताएं प्रमुखता से सामने आएंगी।
हालांकि, संघ के एक वरिष्ठ पदाअधिकारी कहते हैं,‘जो सुधरने को तैयार नहीं उनके बारे में क्या चिंता और क्यों चिंतन..। पर, उनकी यह टिप्पणी ही यूपी को लेकर संघ की चिंता का प्रमाण है।
संघ कहीं न कहीं इस बात से चिंतित है कि प्रदेश भाजपा जिस राह पर आगे बढ़ रही है। जिस तरह दागियों को शामिल किया जा रहा है। उससे मोदी के नाम से बनी हवा का मजा किरकिरा न हो जाए।
भाजपा ही नहीं बल्कि विहिप सहित अन्य संगठनों के कामकाज की भी समीक्षा होगी। इस बीच, संघ की नाराजगी के खतरे को समझते हुए भाजपा ने अपनी गरदन बचाने की कोशिश शुरू कर दी है।
संघ का प्रदेश नेतृत्व यूपी भाजपा के कामकाज और नीति को लेकर पिछले एक वर्ष से असंतुष्ट व क्षुब्ध है।
भाजपा में पदाधिकारियों के चयन से लेकर विवादित चेहरों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने तक पर संघ की तरफ से आपत्ति उठ चुकी है। पर, भाजपा नेताओं ने राह नहीं बदली तो नहीं बदली।
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संघ की चिंता यह है कि अब मोदी के नाम से कमल खिलने की उम्मीद पैदा होने के बावजूद भाजपा नेता राह पर आने को तैयार नहीं दिखते।
विधानसभा चुनाव के वक्त बाबू सिंह कुशवाहा प्रकरण से चारों तरफ हुई किरकिरी से सबक लेने को तैयार नहीं है। अगर यही हाल रहा तो मोदी के सहारे कमल खिलाने की उम्मीद पर पानी फिर सकता है।
भाजपा ही नहीं विहिप की यूपी में स्थिति से भी संघ संतुष्ट नहीं है। अयोध्या में परिक्रमा व फिर संकल्प सभाओं की स्थिति ने भी उसे चिंता में डाल दिया है। इस बारे में भी कोच्चि में विचार होने के संकेत हैं।
किए-कराए पर फिर न जाए पानी
जानकारी के मुताबिक, भाजपा के प्रदेश व केंद्र के कुछ नेताओं की भूमिका से भी संघ के राज्य स्तरीय पदाधिकारी असहज से हैं।
समय-समय पर संघ की तरफ से यूपी को लेकर अपनी चिंता से वरिष्ठ व केंद्र्रीय पदाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है।
यह भी बताया जा चुका है कि भूमिका किसी की भी हो, लेकिन यूपी में भाजपा में दूसरे दलों के विफल, दलबदलू और दागी चेहरों को शामिल करने की सिलसिला आत्मघाती कदम हो सकता है।
जो स्थिति है उससे संघ परिवार के अन्य संगठनों में ही नहीं बल्कि खुद भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
'मोदी की चले तो मुस्लिमों को देश से ही निकाल दें'
ये सवाल उठने लगे हैं कि दुर्दिन में संघर्ष वह करें। लाठी-डंडा वह खाएं। पर, जब कुछ पाने का मौका आए तो दूसरों को लेकर उन्हें ताज सौंप दिया जाए।
यही नहीं, जनता के बीच भी गलत संदेश जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि मोदी के मिशन को परवान चढ़ाने के लिए भाजपा के पास दागियों को साथ लेने के अलावा दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है।
तलाशेंगे उपाय
चार दिन चलने वाली कोच्चि बैठक में न सिर्फ चार राज्यों में हो रहे चुनाव बल्कि लोकसभा चुनाव के बारे में भी निर्णय लिए जा सकते हैं।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक, प्र्रांत कार्यवाह व प्रांत प्रचारक तथा इनसे ऊपर के पदाधिकारी भाग लेंगे।
भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल और विहिप के महामंत्री चंपत राय को भी बैठक में बुलाया गया है।
कहीं संघ की नाराजगी का तो असर नहीं
जानकारी के मुताबिक, भाजपा की तरफ से जिला व क्षेत्र के पदाधिकारियों को एक प्रोफार्मा भेजा जा रहा है।
जिसमें पार्टी से जुड़े स्थानीय लोगों से उन लोगों के बारे में जानकारी भरी जाएगी जो भाजपा में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं।
फीडबैक में उनके आपराधिक रिकॉर्ड से लेकर सामाजिक स्थिति और किस-किस दल में रह चुके हैं, इस सबका ब्योरा रहेगा।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि किसी दागी को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा।
माना जा रहा है कि भाजपा के प्रदेश नेताओं ने भावी खतरे को भांप लिया है। तभी गरदन बचाने के लिए यह कवायद शुरू की गई है।
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