सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने के बजाय उन पर ठंडे पानी की बौछार करने और लाठी चलाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कृषि विरोधी नीतियों से किसान आंदोलित व आक्रोशित है। अपने आचरण से भाजपा ने संवेदनशून्य चाल-चरित्र, जनविरोधी व साजिश की राजनीति की वास्तविक पहचान करा दी है। उन्होंने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि देश में 70 प्रतिशत लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। फिर भी अपने ही देश में भाजपा ने किसानों को बेगाना बना दिया है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने, फसल के उत्पादन लागत का डेढ़ गुना देने जैसे वादे भाजपा सरकार की सिर्फ जुमलेबाजी है। वादों से मुकरने वाली भाजपा सरकार से इसीलिए किसानों का विश्वास उठ गया है। उसने कृषि सुधार नहीं, कृषि उजाड़ कानून बनाया है। सपा शुरू से ही कृषि संबंधी तीनों कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए उन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की थी। कहा- सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान को घाटा न हो। लेकिन भाजपा का खेती-गांव-किसान से कभी रिश्ता ही नहीं रहा। अमीरों की पक्षधर भाजपा गरीब हलधर का दर्द क्या जाने?
किसान मर रहे, चैन की बंशी बजा रही सरकार
सपा अध्यक्ष ने कहा, किसानों के अधिकारों को कुचलने के लिए भाजपा सरकारी आतंक का सहारा ले रही है। लोग मर रहे हैं और सरकार चैन की बंशी बजा रही है। इसके नतीजे अच्छे नहीं होंगे। शांतिपूर्ण अहिंसात्मक प्रदर्शन करना लोकतंत्र में लोगों का सांविधानिक अधिकार है। लेकिन भाजपा सरकार किसानों की बात सुनने के बजाय अपनी हठधर्मिता पर अड़ी है।