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वरुण क्लीन बोल्ड, योगी 16वें नंबर पर

Thu, 04 Sep 2014 03:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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कहने को तो वे भाजपा के स्टार प्रचारक हैं लेकिन सूची में 16वें नंबर पर नाम दर्ज किया गया है। वजह चाहे जो हो लेकिन सूची देखकर लगता है कि भाजपा ने उपचुनाव के जरिये योगी आदित्यनाथ की दम-खम परखने की पूर्व घोषणा पर अपने पैर कुछ पीछे खींच लिए हैं।
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तभी तो योगी के चेहरे के साथ चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान करने वाली भाजपा ने चुनाव आयोग को सौंपी गई प्रचारकों की सूची में उनका नाम 16वें नंबर पर रखा है। सबसे चौंकाने वाली बात वरुण गांधी का सूची में नाम न होना है।

लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा को महत्व देते हुए सूची में हेमामालिनी, नवजोत सिंह सिद्धू, स्मृति ईरानी, विनय कटियार व मुख्तार अब्बास नकवी से ऊपर चौथे नंबर पर रखा गया है।
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उनसे ऊपर अमित शाह व राजनाथ सिंह के अलावा सिर्फ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के ही नाम हैं।

लव जेहाद का तो असर नहीं?

पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर तर्क देते हैं कि सूची एक व्यवस्था है। उसमें ऊपर-नीचे नाम होने का कोई अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। संगठन के लिए हर नेता व कार्यकर्ता समान रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह तर्क गले से नीचे उतरने वाला नहीं है।

ऐसा भी लग रहा है कि पार्टी के रणनीतिकार लोकसभा चुनाव की तरह ही इस उपचुनाव में भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से बचना चाहते हैं।

इसीलिए वे किसी ऐसे चेहरे को मुख्य भूमिका में नहीं रखना चाहते, जिससे मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो। माना जा रहा है कि पार्टी ने पहले योगी के जरिये एक ऐसी छवि वाले नेता को विकल्प के तौर पर आगे रखने की तैयारी की थी, जो सफल होने के साथ-साथ जमीनी जनाधार वाला हो।

लोगों की उम्मीदों को पूरी करता दिखे, पर जिस तरह लव जेहाद का मामला उठा और योगी से संबंधित सीडी व उनके इंटरव्यू को लेकर माहौल गरमाया, उसके चलते रणनीतिकारों को उस कदम से लाभ कम, नुकसान होने की आशंका ज्यादा दिखी।

क्या कह रहा है वरुण के साथ सलूक?

पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची से बाहर होने के बाद वरुण गांधी का नाम प्रचारकों की सूची से भी गायब कर दिया गया है।

यह उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो वरुण गांधी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम से हटने के बाद मान रहे थे कि उन्हें यूपी में महत्वपूर्ण भूमिका देने के लिए मुक्त किया गया है।

जो चर्चा कर रहे थे कि वरुण को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रचारकों की सूची में वरुण का नाम न होने से इस तरह की चर्चाएं बेदम लगने लगी हैं।

उल्टे ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व सभी को पार्टी की योजना के मुताबिक ही काम करना होगा। मनमानी करने वालों को किनारे कर दिया जाएगा।

शाह का ये भी बड़ा प्लान

प्रचारकों की सूची देखने से पता चलता है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव में दलित व पिछड़ों के बीच बनी पहुंच को और मजबूत करना चाहते हैं।

पार्टी के रणनीतिकार इस वर्ग के मतदाताओं में विरोधियों की सेंधमारी भी रोकना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि सूची में इन वर्गों के नए चेहरों कौशल किशोर, डॉ. यशवंत, विनोद सोनकर, सावित्री बाई फूले, डॉ. संजीव बालियान, बाबूराम निषाद, रमाकांत यादव, केशव मौर्य व रवींद्र कुशवाहा को शामिल किया है।

पार्टी संगठन में भी इस वर्ग को प्रमुखता दी गई है और पार्टी के लोगों को उम्मीद है कि आगे भी संगठन में इस वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ जाएगा।
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ये हैं भाजपा के प्रचारक

अमित शाह, राजनाथ सिंह, रामलाल, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, डॉ. दिनेश शर्मा, कलराज मिश्र, मुख्तार अब्बास नकवी, भगत सिंह कोश्यारी, रामशंकर कठेरिया, स्मृति ईरानी, सेवानिवृत्त सेना प्रमुख वीके सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, विनय कटियार, डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, सूर्यप्रताप शाही, योगी आदित्यनाथ, लालजी टंडन, हुकुम सिंह, संतोष गंगवार, सुनील बंसल, स्वतंत्रदेव सिंह, शिवप्रताप शुक्ल, राजवीर सिंह, साध्वी निरंजन ज्योति, पंकज सिंह, हेमा मालिनी, डॉ. संजीव बालियान, मुकुट बिहारी वर्मा, भूपेंद्र सिंह, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, लक्ष्मण आचार्य, बाबूराम निषाद, कौशल किशोर, विनोद सोनकर, डॉ. यशवंत सिंह, केशव मौर्य, रवींद्र कुशवाहा, सावित्री बाई फूले और रमाकांत यादव।
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