यूपी के मुस्लिम डीजीपी ने एक बड़े हत्याकांड के आरोपी को आतंकी बताकर अखिलेश को टेंशन दे दी, लेकिन वे अब भी अड़े हुए हैं।
आतंकी बताने के पीछे डीजीपी यह तर्क दे रहे हैं कि सैफ के खिलाफ भिवंडी में आतंक फैलाने व मकोका जैसी धाराओं में केस दर्ज है। उनसे अमर उजाला ने कुछ सवाल किए, तो उन्होंने कुछ ऐसे जवाब दिए।
अमर उजाला: सैफ किस आतंकी संगठन का सदस्य है?
डीजीपी : इस बात की जानकारी अभी नहीं हो सकी है। उसके खिलाफ आतंकी घटना करने का मुकदमा पहले से ही दर्ज है।
अमर उजाला : अगर यूपी पुलिस को सैफ के किसी आतंकी संगठन से जुडे़ होने की जानकारी नहीं मिली तो क्या आपने आईबी
जैसी किसी जांच एजेंसी से इस बाबत पूछा?
डीजीपी : हां हमने आईबी से पूछा है।
अमर उजाला : ऐसी कौन सी गोपनीय जानकारी है जो सैफ के किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने की जानकारी आईबी ने आपको
अभी तक नहीं दी?
डीजीपी : आईबी से जानकारी जल्द मिल जाएगी
...और जब पूछा गया यह सवाल
अमर उजाला ने जब डीजीपी से यह सवाल किया सैफ किस राजनीतिक दल से जुड़ा है? इस पर डीजीपी ने जवाब दिया, 'ऐसा मेरी जानकारी में नहीं है। जब उनसे यह पूछा गया कि जब एटीएस को नहीं पता कि वह किस आतंकी संगठन से है, तो आपने उसे आंतकी कैसे कह दिया तब उन्होंने कहा, 'उसके खिलाफ भिवंडी में आतंक फैलाने व मकोका और अनलॉ फुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इस आतंकी पर वहां पोटा के तहत मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।'
क्या कहा था डीजीपी साहब ने
अंबेडकरनगर के टांडा में हिंदू युवा वाहिनी के जिला संयोजक रामबाबू और उनके भतीजे की हत्या में गिरफ्तार सैफ को खतरनाक आतंकी बताने वाले बयान पर डीजीपी रिजवान अहमद फंसते जा रहे हैं। वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि सैफ किस आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि डीजीपी ने पिछले दिनों कहा था कि सैफ ने यह हत्याएं गुजरात दंगे का बदला लेने के लिए कराई। उन्होंने कहा कि आतंकवादी सैफ ने स्वीकार किया कि गुजरात दंगों के बाद से उसके मन में कट्टरवादी हिंदुओं के प्रति घृणा भर गई थी। इसी वजह से उसने दोनों हत्याएं कराईं।
सपा सरकार का है करीबी!
डीजीपी के इस बयान को वैसे राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़ा जा रहा है। इसका कारण यह है कि जिसे गिरफ्तार कर आतंकी बताया जा रहा है वह सपा के उस विधायक का नजदीकी बताया जाता है, जिस पर रामबाबू के परिवार के सदस्यों ने बार-बार हत्या कराने का इल्जाम लगाया।
इतना ही नहीं सैफ को सपा सरकार के एक राज्यमंत्री के साथ अंबेडकरनगर में लैपटॉप वितरण समारोह में भी प्रमुख भूमिका में देखा जा चुका है। राज्य मंत्री के साथ मंच पर बैठे सैफ की तस्वीरें भी छपी हैं। ऐसे में सैफ की गिरफ्तारी के क्या मायने हो सकते हैं, यह अपने आप में साफ है।
कहीं मोहरा तो नहीं बनाया गया?
वैसे यह बात भी चर्चा में है कि भिवंडी पुलिस ने यूपी पुलिस से संपर्क कर उसे जानकारी दी थी कि उसके यहां एक मुकदमे में वांछित सैफ अंबेडकरनगर में सक्रिय है। साथ ही सपा विधायक को क्लीन चिट देने के लिए पुलिस को एक ऐसा मोहरा चाहिए था जिसकी गिरफ्तारी पर किसी तरह की चर्चा नहीं होती है।
सैफ का पुराना आपराधिक इतिहास देखते हुए उसे गिरफ्तार कर विधायक को क्लीन चिट दे दी गई। डीजीपी रिजवान अहमद के साथ ही आईजी कानून-व्यवस्था अमरेंद्र सेंगर से जब सैफ के सपा समीकरणों के बारे में पूछा गया तो दोनों ही अधिकारियों ने इसका साफ जवाब नहीं दिया। अधिकारियों का कहना था कि किसी समारोह में सैफ के पहुंचने का मतलब यह नहीं हुआ कि वह समारोह आयोजित कराने वाली पार्टी से जुड़ा हुआ है।
सैफ को लेकर स्थिति साफ करे सरकार: कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा नेता रामबाबू व उनके भतीजे की हत्या के आरोपी सैफ उर्फ अबू बकर के बारे में डीजीपी के बयान की निंदा की है। पार्टी प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि इस मामले में डीजीपी कुछ बोल रहे हैं और एटीएस व आईजी कानून व्यवस्था कुछ और बयान दे रहे हैं।
जनता हकीकत जानना चाहती है। राज्य सरकार ऐसे संवेदनशील मामले में तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे। बताते चलें कि जिस सैफ को डीजीपी रिजवान ने आतंकी करार दिया था उसके बारे में एटीएस को कोई जानकारी ही नहीं है।