कायदे-कानून से काम करने की दुहाई देने वाले भाजपा नेता अपने पार्टी के संविधान को ही भूल गए।
जैसे तमाम घोषणाएं व फैसले जमीन पर नहीं उतर पा रहे हैं, वैसे ही पार्टी संविधान और उसके प्रावधान भी भाजपा नेताओं की जुबान तक ही सीमित हैं।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को ही लें। छह महीने से प्रदेश कार्यसमिति की बैठक ही नहीं बुलाई गई है।
पार्टी संविधान के मुताबिक, तीन महीने में एक बार प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अनिवार्य है। कार्यसमिति की पिछली बैठक अप्रैल में चित्रकूट में हुई थी।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने घोषणा भी की थी कि आगे से संविधान के मुताबिक प्रत्येक तीन माह पर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक जरूर होगी। पर, ऐसा नहीं हो पाया।
पढ़ें-नरेंद्र मोदी के 'स्टैंडर्ड' से परेशान हुए भाजपाई
बीच में एक बार यह चर्चा चली कि मथुरा में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। पर, नरेंद्र मोदी की मंजूरी के इंतजार में यह बैठक तय ही नहीं हो पाई। कब बैठक होगी?
इस सवाल पर पार्टी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि इधर पार्टी रैलियों की तैयारी में व्यस्त रही।
पर, पार्टी संविधान के उल्लंघन का सवाल ही नहीं है। विचार-विमर्श चल रहा है। जल्द ही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की तारीख तय हो जाएगी।
गौरतलब है कि पार्टी नेताओं का संविधान उल्लंघन का यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई प्रसंग सामने आ चुके हैं।
पदाधिकारियों की नियुक्ति की बात हो या अन्य संगठनात्मक गतिविधियां। पार्टी का संविधान मौके से नेताओं के दिमाग से उतर जाता रहा है।
लखनऊ की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें यहां