राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मंदिर पर अभी तक ठोस कार्रवाई न होने से हिंदुओं में उपज रही निराशा ने संघ परिवार के प्रमुख लोगों को चिंता में डाल दिया है। इन्हें आशंका है कि निराशा और नाउम्मीदी के इस माहौल को दूर न किया गया तो मिशन 2019 में फतह के लिए चुनावी लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाने की रणनीति सफल बनाना काफी मुश्किल होगा।
भगवा टोली के रणनीतिकार जानते हैं कि आम हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर निर्माण के आड़े आ रही कानूनी और तकनीकी अड़चनों से बहुत लेना-देना नहीं है। वे तो सिर्फ मंदिर पर काम आगे बढ़ते देखने चाहते हैं। इसी को समझते हुए भगवा टोली ने पूरी कार्ययोजना का खाका खींचा है। जिसका मुख्य मकसद मंदिर निर्माण पर लोगों को आश्वस्त करना नजर आता है।
उच्चाधिकारी समिति के फैसले के अनुसार कानून बनाकर मंदिर निर्माण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की मांग उठाने नवंबर में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में प्रस्तावित सभाओं को सफल बनाने के लिए भी विहिप ने सभी जगह टोलियों का गठन शुरू कर दिया है। संसदीय क्षेत्रों में सभाओं के बाद लखनऊ में भी बड़ी सभा करने की योजना है।
संत-महात्माओं की तरफ से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखवाने के लिए भी विहिप के कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाई जा रही हैं। विहिप के प्रदेश मंत्री देवेन्द्र मिश्र कहते हैं कि मंदिर पर अब और इंतजार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल जनवरी तक जनजागरण के ये कार्यक्रम होंगे। प्रयाग में कुंभ के दौरान 31 जनवरी तथा 1 फरवरी को आयोजित धर्म संसद में संत-महात्मा मंदिर निर्माण के लिए अगले एजेंडे का एलान करेंगे। विहिप के कार्यकर्ता उस एजेंडे पर काम करेंगे।